पिछले 15 दिनों से गुडगांव के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीज अस्पताल के लिए चिंता और हैरानी का कारण बन गए हैं। यह मरीज कोई और नहीं फोर्टिस अस्पताल में ही काम करने वाली नर्सें हैं। डॉक्टरों के मुताबिक कुछ की तो हालत इतनी खराब है कि उन्हें आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा।
फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट (एफएमआरआई) के नर्सिंग स्टाफ के करीब 50 सदस्य बीमार पड़ गए हैं। डॉक्टरों को अंदेशा है कि अस्पताल के ही हॉस्टल जहां यह नर्सें रहती हैं वहां के दूषित पानी से इनकी तबियत खराब हुई है।
अस्पताल से एक किलोमीटर के ही दायरे में इसके सात हॉस्टल (A से लेकर G तक) सेक्टर-44 के कन्हाई गांव में बने हैं। इनमें कुल 450 नर्स स्टाफ रहता है। इस स्टाफ में महिला और पुरूष दोनों शामिल हैं।
दूसरे अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं इनके स्टाफ
अस्पताल के अधिकारियों के मुताबिक हॉस्टल में रहने वाले सभी नर्सिंग स्टाफ के लिए खाना हॉस्टल 'सी' में बनता है। उन्होंने बताया कि कुछ नर्सें तो 15 दिन पहले से बीमार हैं लेकिन इनकी संख्या पिछले कुछ दिनों में ज्यादा बढ़ गई है।
इन नर्सों को डायरिया और उल्टी की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती किया गया है। सूत्रों के अनुसार हॉस्टल के कुक, सुरक्षा गार्ड और अन्य सहायक स्टाफ भी बीमार पड़ गए हैं और उनका इलाज पास के अस्पताल में चल रहा है।
एफएमआरआई के डॉक्टरों ने बताया है कि पिछले दो-तीन दिनों में बीमार पड़ने वाले नर्सों की संख्या बढ़ गई है। हॉस्टल में रहने वालों ने डायरिया और उल्टी की शिकायत की थी। इसलिए यह आशंका है कि अस्पताल के हॉस्टल में पकाया जाने वाला खाना दूषित पानी में बन रहा है।
तो क्या हॉस्टल के पानी में ही है खराबी?
गौरतलब है कि हॉस्टल में पीने का पानी गुड़गांव नगर निगम सप्लाई करता है। यही पानी पूरे कन्हाई गांव में सप्लाई किया जाता है। लेकिन नगर निगम पार्षद सरोज का कहना है कि अबतक ऐसी कोई और घटना सामने नहीं आई है।
हॉस्टल के एक सहायक कर्मी ने बताया कि हालांकि एमसीजी से यहां पानी सप्लाई होता है लेकिन अस्पताल में सबमर्सिर्बल पम्प के साथ-साथ वाटर ट्रीटमेंट प्लांट भी लगे हैं। लेकिन सोमवार से यहां बॉटल के पानी से खाना पकाया जा रहा है और मंगलवार को तो अस्पताल से पानी के 70 कैन लाए गए हैं।
अस्पताल के प्रवक्ता ने बताया कि पानी के सैंपल को जांच के लिए भेज दिया गया है। कुछ नर्सें जो हॉस्टल में रह रही हैं, गैस्ट्रोएंटराइटिस से पीड़ित थीं। इलाज के बाद वह बेहतर हैं। पानी के जांच की रिपोर्ट आने के बाद ही इनके बीमारी का कारण पता चल पाएगा।