पटियाला हाउस कोर्ट ने शुक्रवार को यूनिटेक के पूर्व प्रमोटरों संजय चंद्रा और अजय चंद्रा को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जमानत दे दी है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धीरज मोर ने जमानत देते हुए कहा कि इस मामले में दोनों आवेदक पिछले ढाई साल से जेल में बंद हैं, हालांकि मामले की सुनवाई अभी तक शुरू नहीं हुई है।
इस मामले में अधिकतम सजा सात साल है और वे इस मामले में दी जाने वाली अधिकतम सजा का एक बड़ा हिस्सा पहले ही काट चुके हैं। शिकायत में 71 आरोपी, 121 गवाह और लाखों सहायक दस्तावेज हैं। दस्तावेजों के विशाल सेट, अभियोजन पक्ष के गवाहों और आरोपियों की बड़ी संख्या के साथ-साथ इस तथ्य को देखते हुए कि इस मामले में दो साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अभी तक मुकदमा शुरू नहीं हुआ है, यह दर्ज करने में कोई हिचकिचाहट नहीं है कि यह मुकदमा सात साल से आगे जा सकता है, जो मामले में अधिकतम सजा से भी अधिक है।
अदालत ने कहा कि मुकदमे से पहले हिरासत का उद्देश्य कभी भी दंडात्मक नहीं हो सकता। किसी अपराध के लिए दोषी ठहराए जाने से पहले हिरासत या जेल में रखना बिना मुकदमे के सजा नहीं बन जाना चाहिए। इस मामले में मुकदमा तय समय में पूरा नहीं हो सकता है। सह-आरोपी प्रीति चंद्रा और राजेश मलिक को करीब डेढ़ साल तक जेल में रहने के बाद पहले ही जमानत पर रिहा किया जा चुका है।