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विदेशी अखबार ने खोली रॉबर्ट वाड्रा की पोल

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कोलकाता से छपने वाले एक विदेशी अखबार की एक खबर से कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा के जमीन खरीद का जिन्न एक बार फिर से बाहर आ गया है।
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इसमें गुड़गांव में जमीन खरीद का जिक्र किया गया है। वहीं जमीन के सौदे की डील रद्द करने वाले आईएएस अधिकारी अशोक खेमका का भी नाम लिया गया है। इसके साथ ही सियासत भी गर्म हो गई है।

चुनावी मौसम में वाड्रा की जमीन के बारे में ऐसा खुलासा कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है।

वाड्रा ने किया बड़ा खेल!

अखबार के मुताबिक वर्ष 2004 में जब कांग्रेस सोनिया की अगुवाई में दोबारा सत्ता तक पहुंची तो वाड्रा सस्ती कॉस्ट्यूम ज्वेलरी निर्यात करने का छोटा कारोबार चला रहे थे।

2007 के अंतिम दौर में उन्होंने रियल एस्टेट कारोबार में कदम रखा। स्काई लाइट हॉस्पिटेलिटी प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी बनाई। कंपनी की फाइलिंग के मुताबिक उस वक्त कंपनी के पास सिर्फ  एक लाख 20 हजार रुपए थे।

अखबार में बताया गया है कि 2008 की शुरुआत में वाड्रा की कंपनी ने करीब आठ करोड़ रुपए में गुड़गांव में साढ़े पांच एकड़ जमीन खरीदी। दो महीने बाद वाड्रा ने कांग्रेस की अगुवाई वाली राज्य सरकार के पास आवेदन कर खेती की जमीन को कमर्शियल में बदलने की अपील की।
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हरियाणा सरकार भी घेरे में!

अखबार में कहा गया है कि मात्र 18 दिन बाद हरियाणा सरकार की ओर से उनका आवेदन स्वीकार कर लिया गया। इससे जमीन के दाम बढ़ गए।

साथ ही अगले चार साल के दौरान रियल एस्टेट डेवलपर डीएलएफ ने करोड़ों डॉलर वाड्रा की कंपनी में डाले और बैलेंस शीट में इसे लोन की तरह दिखाया गया। 2012 में डीएलएफ  ने कहा कि उसने वाड्रा की कंपनी से करीब 60 करोड़ रुपए में जमीन खरीदी है। यह खरीद कीमत से सात गुना ज्यादा थी।

हरियाणा में एक आला अफसर अशोक खेमका ने इस डील पर गौर किया और कहा कि जब 2008 में यह सौदा हुआ था तो वाड्रा की कंपनी के पास भुगतान के पैसे तक नहीं थे। खेमका ने अनियमितताओं का संदेह जताते हुए डील रद्द करने की बात कही। इसके तुरंत बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री ने खेमका के ट्रांसफर के आदेश दे दिए थे।
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