एनएच-24 धंसने के लिए गंगाजल चोरों के साथ-साथ सिंचाई विभाग के निर्माणाधीन तटबंध भी इसका बड़ा कारण बना।
डूब क्षेत्र में बनीं प्राइवेट बिल्डर और आवास विकास परिषद की सिद्धार्थ विहार आवासीय योजना को बचाने के लिए सिंचाई विभाग ने हिंडन के किनारे तटबंध बनाया था।
हाईवे धंसने की जांच कर रही सीनियर इंजीनियर की टीम ने भी माना है कि नाले के रास्ते में मिट्टी भरकर बनाए गए तटबंध से पानी हिंडन में नहीं जा सका और हाईवे धंस गया।
स्थानीय लोगों और जल निगम अधिकारियों के मुताबिक गंगाजल लाइन के वॉल्व से पानी निकलने की घटना पहले भी 50 से ज्यादा बार हुई, लेकिन उस वक्त बंधा नहीं बना था।
लीकेज हुआ पानी वॉल्व के निकट से बह रहे नाले के जरिए हिंडन नदी में चला जाता था। कुछ माह पूर्व ही सिंचाई विभाग ने हिंडन नदी के बगल में ही बन चुकी हाउसिंग सोसायटियों को बचाने के लिए बंधा बनाया था।
ऐसे में वॉल्व से लीकेज पानी का नाले में जाने का रास्ता बंद हो गया। यही वजह रही कि वॉल्व से छेड़छाड़ ms निकला लाखों लीटर गंगाजल नाले के जरिए हिंडन में जाने की बजाय एनएच-24 के नीचे समा गया। इस पानी की वजह से मिट्टी कटान हुआ तो हाईवे धंस गया।
तटबंध के सहारे बिल्डर पहुंचे नदी किनारे: नदी के किनारों से 500 मीटर दूर तक हिंडन का डूब क्षेत्र माना गया है। इसमें रिहायशी बिल्डिंग नहीं बन सकती, लेकिन बेशकीमती जमीन पर सरकारी विभागों और प्राइवेट बिल्डरों की नजरें काफी पहले से हैं।
आविप ने तटबंध से फंडिंग की और सिंचाई विभाग ने निर्माण किया। अब डूब क्षेत्र की कौड़ियों की जमीन को करोड़ों में बेच रहे हैं। कई बिल्डर प्रोजेक्ट यहां खड़े हो गए हैं।