कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री कैप्टन अजय सिंह ने कहा कि जून 2009 में गुड़गांव के चार गांवों के किसानों के साथ भूमि अधिग्रहण के नाम पर अन्याय हुआ था। उस दौरान सबसे अधिक लाभ बिल्डरों को हुआ था। कैप्टन ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि वह इस मामले की निष्पक्ष जांच कराए। इसमें दोषी पाए जाने वाला व्यक्ति चाहे नेता हों, अधिकारी या बिल्डर उसे कड़ी सजा दिलवाई जाए।
कैप्टन अजय सिंह ने मीडिया को जारी अपने बयान में कहा कि तत्कालीन सरकार ने गांव घाटा, मैदावास, उल्लावास और बादशाहपुर के किसानों की करीब 1400 एकड़ जमीन के अधिग्रहण के लिए सेक्शन चार का नोटिस जारी किया गया था। मार्च 2010 में इसमें से 850 एकड़ जमीन के लिए सेक्शन छह का नोटिस जारी किया गया था।
इसके बाद बिल्डरों ने किसानों को सरकारी अधिग्रहण का खौफ दिखा, उनकी जमीन को आनन-फानन में अपने नाम करा लिया था। उन्होंने किसानों से कहा कि अगर सरकार उनकी जमीन लेगी तो उसका भाव उन्हें काफी कम मिलेगा। अगर किसान अपनी जमीन बिल्डर को देते हैं तो उन्हें फायदा होगा। इससे किसान बिल्डरों के झांसे में आ गए और उन्हें जमीन बेच दी।
बिल्डरों ने जीपीए के माध्यम से किसानों की जमीन पर अपना मालिकाना हक पा लिया, जबकि उस समय प्रदेश भर में जीपीए पर पाबंदी थी। बिल्डरों ने किसानों से उनकी जमीन का जीपीए फरीदाबाद सहित प्रदेश के अन्य जिलों से कराया। इसमें किसानों को करीब 3000 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। कैप्टन ने इस पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जब बिल्डरों ने किसानों की जमीन हड़प ली तब सरकार ने सिर्फ 90 एकड़ जमीन का अधिग्रहण कर बाकी को इससे मुक्त कर दिया। कैप्टन ने कहा कि यही नहीं मुक्त करते ही सरकार ने बिल्डरों को लाइसेंस भी दे दिया था। इसकी जांच होनी चाहिए।