ग्रेटर नोएडा के जीरो पाइंट से जेवर टोल प्लाजा तक यमुना एक्सप्रेस वे पर पिछले वर्षो में कोहरे के कहर से कई भयानक हादसे हो चुके है। इन हादसों में कई जिंदगियां जाने के बावजूद भी एक्सप्रेसवे और पुलिस प्रशासन द्वारा कोहरे से बचाव के लिए कोई बंदोबस्त नहीं किया गया है।
एक्सप्रेसवे पर हाइवे मार्कर और रिफ्लेक्टर लगाए हुए हैं, जिनके भरोसे सफर होगा। आंकडों पर गौर करें तो हर 60वें घंटे में एक्सप्रेसवे पर हादसे में एक मौत हो रही है।
अब जबकि सर्दियां शुरू हो चुकी है और सुबह के समय हल्का कोहरा भी पड़ने लगा है। कोहरा पड़ने पर हादसे न हो इस संबंध में कई बार सामाजिक संगठन भी एक्सप्रेस-वे प्रशासन से जरूरी इंतजाम करने की मांग कर चुके हैं। ग्रेटर नोएडा से आगरा तक 165 किलोमीटर लंबे बने यमुना एक्सप्रेसवे पर सर्दियों में कोहरा पड़ने पर अधिकतर हादसे जीरो प्वाइंट से जेवर टोल प्लाजा के बीच होते हैं।
पिछले वर्ष के दिसंबर माह में घने कोहरे के कारण दनकौर क्षेत्र स्थित सिलारपुर अंड़रपास पर 41 गाड़ियां एक साथ टकरा गई थी। गनीमत रही कि इस हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ था। लगातार कई दिन तक कोहरा पड़ने के चलते चार दिन बाद चपरगढ़ अंडरपास पर मिर्ची से भरा कैंटर खराब होने से 6 गाड़ियां टकराने से कई लोग घायल हो गए थे।
इसी वर्ष जनवरी में घने कोहरे में गाड़ी का पहिया बदल रहे अलीगढ़ निवासी दो लोगों को ट्रक ने कुचल दिया था। यदि आंकडों पर गौर करें तो हर साठवें घंटे पर एक्सप्रेसवे पर हादसे में एक मौत हो जाती है। समाजिक संगठन के सदस्य बले नागर ने बताया कि सर्दियों में कोहरा पडने पर भी तेज स्पीड वाहनों पर कार्रवाई नहीं की जाती है।
यदि कोई वाहन खराब होने पर उसे तत्काल रास्ते से नहीं हटाया जाता, जिसके चलते प्रतिवर्ष कोहरे में हादसे होने से कई जिदंगियां चली जाती है। इस संबंध में एक्सप्रेसवे प्रशासन से कई बार पत्र लिखकर समाधान की मांग करने के बाद भी को सुधार नही हुआ है।