दुबई के कारोबारी से रंगदारी तिहाड़ जेल से मांगी जा रही थी। दिल्ली पुलिस ने तिहाड़ जेल में बंद कुख्यात जितेंद्र गोगी और उसके साथी दिनेश कराला को रिमांड पर लेकर गिरफ्तार किया है।
इनके कब्जे से छह-सात मोबाइल फोन भी बरामद किए गए थे। तिहाड़ प्रशासन ने जेल से बदमाशों के कब्जे से मोबाइल मिलने की बात कबूलते हुए जांच के आदेश दिए हैं। कारोबारी 5500 करोड़ रुपये के हवाला घोटाले में गिरफ्तार हुआ था।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मूल रूप से हरियाणा निवासी गगन जिंदल 6 वर्ष से दुबई में रहते हैं। उनका कई देशों में आयात-निर्यात का कारोबार है। उन्होंने दिल्ली पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वे 15 मार्च, 2020 को व्यवसाय के सिलसिले में भारत आए थे। 23 मार्च को देश में लॉकडाउन हो गया तो वे दिल्ली में फंस गए।
दुबई की नियमित फ्लाइट्स न होने के कारण उन्होंने परिवार को भी दिल्ली बुला लिया। कारोबारी से 7 जुलाई से इंटरनेशनल नंबरों से कॉल कर पांच करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी जा रही थी। नहीं देने उन्हें व उनके परिवार को जान से मारने की धमकी दी गई थी। मामला रोहिणी (नॉर्थ) थाने में दर्ज किया गया। जांच में पता लगा कि रंगदारी की कॉल तिहाड़ जेल से की जा रही हैं।
रंगदारी मांगने वाला मोबाइल भी बरामद
दिल्ली पुलिस ने तिहाड़ प्रशासन से इनके सेल की तलाशी का आग्रह किया। इनके कब्जे से 6-7 मोबाइल फोन बरामद किए गए। वह फोन भी मिल गया, जिससे रंगदारी मांगी गई थी। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, जितेंद्र गोगी गैंगस्टर है और कई गिरोहों से दुश्मनी है।
ऐप के जरिये करते थे वीओआईपी कॉल
तिहाड़ जेल के डीजी संदीप गोयल का कहना है कि दिल्ली पुलिस के आग्रह पर जितेंद्र गोगी की सेल में तलाशी अभियान चलाया गया। इसमें 2-3 मोबाइल फोन बरामद हुए। वह फोन भी बरामद हो गया है, जिससे रंगदारी मांगी गई थी। आरोपी ऐप के जरिए वीओआईपी कॉल कर रंगदारी मांग रहे थे।
कई देशों में फैला है जिंदल का कारोबार
गगन जिंदल का कारोबार कई देशों में फैला हुआ है। डीआरआई ने दिसंबर, 2019 में एक बड़े हवाला रैकेट का खुलासा किया था। इस रैकेट के मास्टर माइंड समेत गगन जिंदल और उसके साथी दिल्ली निवासी विनोद तिहारा को गिरफ्तार किया गया था। रैकेट के तार दुबई, हांगकांग, सिंगापुर, चीन सहित कई देशों से जुड़े पाए गए थे। आरोप है कि इन्होंने दो साल में करीब 5500 करोड़ रुपये का सामान आयात दिखाकर एसईजेड और आईसीडी से ही वापस भेज दिया। इसके बाद निर्यात किए गए माल का एक पैसा भी देश में वापस नहीं आया।