नए कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलनरत किसानों के साथ अब बच्चे भी कूद गए हैं। गाजीपुर बॉर्डर पर दिल्ली के भाई-बहन हरजीत और सुखविंदर भी प्रतिदिन बॉर्डर पर पहले दो घंटे ऑनलाइन पढ़ाई करते हैं और इसके बाद छह घंटे लंगर में सेवा देते हैं।
पिछले 10 दिन से अपने माता-पिता और बुआ के साथ पहुंच रहे दोनों बच्चे अपने साथ कॉपी-किताब भी लेकर पहुंचते हैं। इसके बाद रोजाना स्कूल का काम निपटाकर लंगर की सेवा में लग जाते हैं। बच्चों की मां कुलजीत कौर ने बताया कि उनके पति ऑटो चलाते हैं। त्रिलोकपुरी से रोजाना सुबह वह गाजीपुर बॉर्डर पर परिवार को छोड़ देते हैं, ताकि लंगर में सेवा देकर पुण्य कमाया जा सके और किसानों का हौसला बढ़ाया जा सके।
शाम को ऑटो चलाने के बाद वापस घर ले जाते हैं। नौ वर्षीय हरजीत सिंह कक्षा चार में पड़ता और सुखविंदर कौर नौवीं की छात्रा है। इन दिनों स्कूल बंद हैं। इसलिए व्हाट्सएप ग्रुप पर प्रतिदिन बच्चों का काम आ जाता है। सुबह 11 बजे बच्चे यहां पहुंचने पर स्कूल का काम कर लेते हैं। दोपहर एक से शाम 6 से 7 बजे तक लंगर की सेवा में लगे रहते हैं। वहां वे सब्जी काटने से लेकर लंगर खिलाने की सेवा कर रहे हैं।
11 वर्षीय दर्शन भी खेलता है गतका
बच्चों के समूह में शामिल 11 वर्षीय दर्शन सिंह भी इन दिनों गतका खेल के माध्यम से गाजीपुर बॉर्डर पर नई पहचान बना रहा है। दर्शन सिंह कक्षा छह का छात्र है और वह भी प्रतिदिन त्रिलोकपुरी से गाजीपुर बॉर्डर पर हैरतअंगेज करतब में शामिल गतका खेलकर प्रदर्शनकारियों का मनोरंजन करता है। दर्शन ने बताया कि वह यहां पहुंचने से पहले ही सुबह स्कूल का काम पूरा कर लेता है। इसके बाद यहां आकर परिवार के साथ रहता है और हैरतअंगेज करतब से लोगों का मनोरंजन करता है। शाम को वह घर चला जाता है।