अभी तक बच्चे चीनी मार्केट में तैयार रामलीला किरदारों के मुखौटों से लेकर गदा व त्रिशूल से खेलते थे। लेकिन अब मेक इन इंडिया चीनी प्रोडक्ट पर हावी होता दिख रहा है।
पहली बार हनुमान, कार्टून किरदारों से लेकर मोदी के मुखौटे तक मेक इन इंडिया हैं, जो कि देखने में भी बेहद आकर्षक हैं। खास बात यह है कि मेक इन इंडिया में गदा व त्रिशुल भी उपलब्ध है।
नवरात्र में एक ओर मां दुर्गा के विभिन्न रूपों की स्तुति, तो दूसरी ओर रामलीला का मंचन हो रहा है। बच्चों को अपनी परंपरा, संस्कृति व इतिहास से जोड़ने के लिए इन दिनों बाजारों में रामलीला के किरदारों के प्रयोग होने वाले मुखौटे की खूब बिक्री हो रही है।
पहली बार मार्केट में मेक इन इंडिया के मुखौटे
एशिया की सबसे बड़ी होलसेल मार्केट सदर बाजार का प्रताप मार्केट इन दिनों रामलीला के किरदारों के मुखौटे से लेकर गदा, त्रिशुल, मां दुर्गा के विभिन्न रूपों के मुखौटों से भरा पड़ा है।
आहुजा ट्रेडिंग कंपनी के जॉली आहुजा के मुताबिक, पहली बार मार्केट में मेक इन इंडिया के मुखौटे व अन्य सामान आए हैं, जिनकी सबसे अधिक मांग है।
दुकानदारों के मुताबिक, पहले चीनी मुखौटे आते थे, जो बेहद हल्के होते थे। वे एक या दो बार प्रयोग करने के बाद टूट जाते थे। चीनी मुखौटों के डिजाइन भी आकर्षक नहीं होते थे।
कीमत ज्यादा है कोई नहीं, डिमांड भी है ज्यादा
वहीं मेक इन इंडिया के प्रोडक्ट आते ही मार्केट में उनकी डिमांड सबसे अधिक हो गई है। इसमें हनुमान और कार्टून किरदारों में बैनटम, मिकी-माउस, छोटा भीम भारतीय बाजार के हैं, जबकि अन्य किरदार चीनी।
चीनी मुखौटे जहां पांच रुपये पीस बिक रहे हैं, वहीं मेक इन इंडिया के प्रोडक्ट की शुरुआत 40 रुपये से होती है। दाम में भारतीय मुखौटों की कीमत भले ज्यादा हो, लेकिन वे डिमांड में भी हैं।
मेक इन इंडिया को दर्शाता मोदी मुखौटा बेहद ही आकर्षक है। इसमें डार्क रंगों का प्रयोग नहीं किया गया है। मोदी मुखौटे के पीछे मेक इन इंडिया लिखा हुआ है। इस मुखौटे की कीमत पचास रुपये से शुरू होती है। इसके अलावा एक गदा भी मोदी के नाम से मार्केट में उपलब्ध है, जोकि 60 रुपये में बिक रहा है।