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देश में पहली बार जबड़े का सफल प्रत्यारोपण

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देश में पहली बार जबड़ा प्रत्यारोपण करके अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली ने इतिहास रचा है। प्रत्यारोपण के बाद मरीज पूरी तरह से स्वस्थ और सही तरीके से खा पी सकता है। बातचीत करने में भी उसे कोई दिक्कत नहीं हो रही है।
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एम्स के दंत चिकित्सा विभाग के प्रोफेसर डॉ. अजय राय चौधरी और उनकी टीम में शामिल डॉ. औंगकिला भूटिया व डॉ. संदीप पांडेय ने सफल जबड़ा प्रत्यारोपण किया। डॉ. चौधरी ने बताया कि इस तरह के मरीज काफी हैं, लेकिन अभी तक भारत में जबड़ा प्रत्यारोपण नहीं किया जा रहा था।

लेकिन पहली बार अमेरिका से कृत्रिम जबड़ा लाकर यह प्रत्यारोपण किया गया। इसके बाद मरीज को खाने-पीने, सोने, सांस लेने और मुंह खोलने में किसी तरह की दिक्कत नहीं होगी। प्रत्यारोपण पर तीन लाख रुपये से अधिक का खर्च आया। एम्स में सर्जरी के लिए कोई राशि नहीं देनी पड़ी, लेकिन जबड़े की कीमत तीन लाख रुपये है।
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डॉ. चौधरी ने बताया कि इस तरह की दिक्कत ज्यादातर किसी हादसे के बाद ही होती है। उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के गड़ी तमना गांव के रहने वाले पुरुषोत्तम शर्मा का 19 वर्षीय पुत्र शिवम आठ साल पहले पतंग उड़ाने के दौरान छत से गिर गया था।
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ऐसे में क्या होती है दिक्कत

छत से गिरने पर उसे जो चोट लगी थी, उसका इलाज तो कर दिया गया, लेकिन जबड़े में लगी चोट के इलाज में लापरवाही बरती गई। इसकी वजह से जबड़ा और खोपड़ी का निचला हिस्सा आपस में जुड़ गया, जिसकी वजह से मुंह खोलना मुश्किल हो गया था।

शिवम पिछले आठ साल से मुंह भी नहीं खोल पा रहा था। पीड़ित की एक सर्जरी उत्तर प्रदेश के एक अस्पताल में भी हुई थी, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई थी।

एम्स में चल रही रिसर्च
डॉ. अजय कुमार राय ने बताया कि इस तरह की दिक्कत के कई कारण हो सकते हैं। इस संबंध में दंत विभाग के एक पोस्ट ग्रेजुएट स्टूडेंट की ओर से अध्ययन किया जा रहा है।

ऐसे में क्या होती है दिक्कत
मुंह खोलने, चबाने और बोलने में दिक्कत, मुंह खराब दिखता है, सांस लेने और सोने में भी तकलीफ।

कारण
76 प्रतिशत ऐसे मामले की वजह है दुर्घटना। इसके अलावा जन्म के समय किसी प्रकार की दिक्कत होने पर, रूमोटाइड ऑर्थराइटिस, सर्जरी के बाद किसी तरह की दिक्कत होने पर भी इस तरह परेशानी हो सकती है।
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