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शोर में ही दबकर रह गई तीन सदस्यों वाली भाजपा

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चुनावों में किसी दल को बहुमत मिल जाए तो विपक्ष को अपनी स्थिति देखकर चलना होता है, लेकिन जब बहुमत 95 फीसदी सीटों के साथ ऐतिहासिक हो तो विपक्ष का क्या हाल होता है इसका उदाहरण दिल्ली विधानसभा का पहला सत्र बना।
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बधाई संदेश के बाद आगे बोलने पर विधायकों की पंक्ति से लेकर दर्शक दीर्घा तक भाजपा विधायक दल के नेता की जबर्दस्त हूटिंग हुई। भाजपा आने वाले समय में मात्र तीन विधायकों के साथ अपनी बात किस तरह से सदन में रखेगी, यह बड़ा सवाल आज की स्थिति देखने के बाद खड़ा हो गया है।

भाजपा नेता के मुद्दे उठाने पर विधानसभा अध्यक्ष ने उन्हें नसीहत भी दी कि केंद्र व दिल्ली सरकार में तालमेल हो यह दायित्व आपके कंधे पर ही आता है। ऐसे में दिल्ली सरकार के काम कराने में विजेंद्र सहयोग दें।
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सदन में मात्र तीन विधायक होने के क्या मायने हैं यह अंदाजा उन्हें था, इसलिए ही विधानसभा अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के चुनाव की वोटिंग में हां या ना कहने के बजाए तीनों विधायक चुप रहे। हालांकि बधाई देने के बाद आगे बढ़ने की गलती उन्होंने कर ही दी और पहले ही सत्र में उन्हें उनकी हैसियत का पता चल गया।
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तब हुए थे करारे हमले

इससे पहले 2 जनवरी 2014 को जब कांग्रेस के गठबंधन के साथ आप की सरकार बनाने के बाद सबसे बड़े दल के रूप में भाजपा ने आप व कांग्रेस पर जबर्दस्त हमले किए तो वेल में आए नए विधायक पर यह कहकर कटाक्ष किया गया कि बेचारा नया है। उस समय पर भाजपा विधायक दल के नेता डॉ. हर्षवर्धन व उनके अन्य विधायकों ने आप नेताओं के झूठ बोलने व अन्य मुद्दों पर जमकर कटाक्ष किए थे।

हालात आज पूरी तरह से बदले हुए थे। मुख्यमंत्री के सामने की तीन डायस में छह सीटाें पर भाजपा के तीनों विधायक बैठे थे और इनके पिछले हिस्से की सभी 18 सीटें खाली थीं। विधानसभा अध्यक्ष के रूप में रामनिवास गोयल का चुनाव होने के दौरान भाजपा नेता ओमप्रकाश ने एक अखबार उठाकर बोलने की कोशिश की कि आज के अखबार में छपा है, लेकिन शोर शराबे के बीच अपनी बात दबती देख बैठ गए।
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कुछ यूं रोक दिया गया भाजपा विधायक को

भाजपा विधायक दल के नेता विजेंद्र गुप्ता को बोलने का मौका दिया गया, तो उन्होंने कहा कि आप की सरकार के शपथ लेने के बाद पहली बार किसी सरकार ने मीडिया पर विधानसभा में आने पर पाबंदी लगा दी। अध्यक्ष ने उन्हें रोकते हुए कहा कि इस मौके पर बधाई देने की परंपरा रही है, इस तरह के मुद्दे उठाना न तो आपको शोभा देता है न आपकी पार्टी को।

अध्यक्ष के यह कहने पर आप विधायकों ने काफी देर तक मेजें थपथपाई और दर्शक दीर्घा में बैठे लोगों ने विजेंद्र की जमकर हूटिंग की। अध्यक्ष ने आगे कहा कि मुद्दे उठाने को पांच साल आप भी और हम भी यहीं पर रहेंगे। इसपर विजेंद्र ने हाथ जोड़कर सिर्फ तीस सेकेंड मांगे, लेकिन भारी शोर और हूटिंग में उनकी बात दब गई।

अध्यक्ष ने उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को बोलने को कह दिया। इस बीच विजेंद्र का माइक भी बंद हो गया। उप मुख्यमंत्री के बोलने के बाद उपाध्यक्ष के नाम का प्रस्ताव आया और उपाध्यक्ष का चुनाव होने के बाद सदन स्थगित होने तक बीस मिनट तक विजेंद्र चुपचाप खड़े ही रहे।
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