तावड़ू में अग्निशमन विभाग के पास संसाधनों का अभाव है। इसके चलते आगजनी की कोई बड़ी वारदात होने की स्थिति में आग पर काबू पाना मुश्किल हो सकता है। इसके पीछे सबसे बड़ी दिक्कत अग्निशमन विभाग को स्वायत्त विभाग नहीं बनाया जाना और प्रशासन के अधीन होना है। जिससे विभाग के पास बजट की कमी है। बजट की कमी के कारण कर्मचारियों की नियुक्ति में भी दिक्कत आ रही है।
अग्निशमन विभाग अभी भी अस्थायी कर्मचारियों के भरोसे है। कस्बे में दमकल विभाग का अपना कोई स्थाई भवन नहीं है और ना ही गाड़ियों के खड़े होने के लिए कोई गैराज है। इसके कारण दमकल विभाग की कीमती गाड़ियां खुले आसमान के नीचे खड़ी होने के कारण जर्जर होने लगी हैं।
प्रशासन की ओर से दमकल विभाग की सेवा वर्ष 2011 में तावडू में उपलब्ध कराई गई थी। ताकि क्षेत्र में घटित होने वाली आग की घटनाओं पर शीघ्र काबू पाया जा सके। खंड के 84 गांवों की आबादी करीब डेढ़ लाख है। आबादी के लिहाज से प्रशासन ने दो गाड़ियां क्षेत्र के लिए मुहैया कराई हुई हैं।
दमकल विभाग के पास कुल 10 कर्मचारी हैं। इनमें 6 फायरमैन, 3 चालक व 1 स्थाई फायर अधिकारी हैं। बाकी सभी कर्मचारी अस्थायी हैं। जबकि दो गाड़ियों पर 18 कर्मचारियों की जरूरत है।
फायर ब्रिगेड के पास गाड़ियों में पानी भरने के लिए ट्यूवबेल व टैंक की कोई व्यवस्था नहीं है। इस कारण आगजनी की घटना के वक्त गाड़ियों में पंप इत्यादि से पानी भरने में दमकल विभाग के कर्मचारियों का काफी समय बर्बाद हो जाता है।
कर्मचारी जाकिर, महेंद्र, गगन, अजीत सिंह, दीपक, रविंद्र, कायमदीन, सुखबीर और महेश ने बताया कि आग बुझाने का कार्य बेहद जोखिम भरा है। साधारण जूते व कपड़े होने के कारण उन्हें परेशानी से जूझना पड़ रहा है।
अनुबंध पर लगे कर्मचारियों का अनुबंध फरवरी में समाप्त हो गया है। इसके बावजूद कर्मचारी बिना अनुबंध के काम कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में किसी कर्मचारी के साथ कोई हादसा हो जाए तो उन्हें किसी तरह की मदद मिलना संभव नहीं है। वर्ष 2013 अप्रैल माह में फायरमैन महेश कुमार घायल हो गए थे। अनुबंध खत्म होने के कारण उन्हें आजतक किसी तरह की मदद नहीं मिल पाई है।
इस बारे में फायर अधिकारी भागीरथ शर्मा ने बताया कि समस्याओं के बारे में नपा को पत्राचार कर अवगत कराया हुआ है। वह प्रशिक्षण पर हैं, आने के बाद पुन: पत्राचार कर समस्याओं से निजात दिलवाने की मांग करेंगे।