दिल्ली के शास्त्री पार्क में शुक्रवार सुबह तीन मंजिला इमारत के भूतल पर मच्छरों से बचने के लिए क्वाइल जलाना छह लोगों के लिए जानलेवा साबित हुआ। एक महिला ने बिस्तर के पास क्वाइल जलाई थी जिससे सुबह करीब आठ बजे गद्दे में आग लग गई। देखते ही देखते सभी कमरों में धुआं भर गया। इससे रोजे की सहरी के बाद सो रहे 11 लोगों का दम घुट गया।
पुलिस ने अचेतावस्था में सभी को जगप्रवेश चंद अस्पताल में भर्ती कराया जहां डाक्टरों ने ढाई साल के बच्चे समेत छह लोगों को मृत घोषित कर दिया। पुलिस के अनुसार, सौ गज के डी-54 मकान में अकबर रहता है। पहली मंजिल पर भाई हसमत का परिवार और दो किरायेदार रहते हैं। दूसरी मंजिल पर दूसरा भाई असगर परिवार और चार कमरों में किरायेदार रहते हैं।
तीसरी मंजिल पर असगर की जींस की फैक्टरी है और चार कमरों में किरायेदार रहते हैं। भाई अन्ना एक आपराधिक मामले में जेल में बंद है। अकबर ने बताया कि तड़के सभी लोग सहरी के बाद सो गए थे। अन्ना की पत्नी शुमाइला ने सुबह करीब छह बजे कमरे में क्वाइल जलाकर बिस्तर के पास रख ली और सो गई।
अकबर ने भी बच्चों को बाहर निकाला
कमरे में रोशनदान नहीं होने से आठ बजे धुएं से उसका दम घुटने लगा। नींद खुली तो देखा गद्दे में आग लगी थी। उसने तुरंत शोर मचाकर जानकारी जेठ अकबर को दी। शुमाइला अपने डेढ़ साल के बेटे को लेकर कमरे से बाहर निकल गई। अकबर ने भी बच्चों को बाहर निकाल दिया। उसने आग बुझाने की कोशिश में कमरे में पानी फेंका, लेकिन आग भड़क चुकी थी।
धुआं ऊपरी मंजिल तक पहुंचा तो सो रहे लोगों का दम घुटने लगा। धीरे-धीरे आग की लपटें भी ऊपर की मंजिल तक पहुंच गईं। कुछ लोग धुआं देखकर जैसे तैसे बाहर निकल गए। मौके पर पहुंची पुलिस और दमकल कर्मियों ने मकान में फंसे लोगों को बाहर निकालकर अस्पताल में भर्ती कराया।
इनकी गई जान
पुलिस के अनुसार, मरने वालों की पहचान ढाई साल के हमजा, मोहम्मद जैदुन (47), दानिश (26), महिला नसीम (28), फजलू (50), जहीदुल (36) के रूप में हुई है, जबकि हसमत (38) व बेटी सोनी (15) और जाइरूल (50), रहमान (40), ताजुद्दीन (38) घायल हो गए।
दरअसल, छोटे-छोटे कमरों में भरे दमघोंटू धुएं और अंधेरे के कारण लोग फंस गए। जैसे-तैसे कुछ लोग बाहर निकल आए, लेकिन छह लोग जान नहीं बचा पाए। हसमत और नाजमीन भी अपने चार में से तीन बच्चों को ही निकाल पाए। जब ढाई साल के बेटे हमजा की मौत की जानकारी नाजमीन को मिली तो वह बेसुध हो गई। वह बस एक ही बात बार-बार बोल रही थी कि ‘हाय मेरा हमजा।’
सहरी खाकर सो गए थे सभी
पड़ोस की महिलाएं उसे किसी तरह संभालने को कोशिश कर रही थीं। महिलाएं उसे धूप से हटकर छांव में बैठने के लिए कहती रहीं, लेकिन नाजमीन दीवार की टेक लिए बेसुध पड़ी रही। बच्चे कभी उससे लिपटते तो कभी लोगों को देखते। पहली मंजिल पर परिवार ने सुबह चार बजे उठकर एक साथ सहरी की थी और सो गए थे। करीब 8 बजे भूतल से चीख सुनकर जागे तो कमरा धुएं से भरा था। बिजली भी गुल थी। अंधेरे और धुएं के कारण कमरे में कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। नाजमीन और पति हसमत जान बचाकर तीन बच्चों को किसी तरह घर से बाहर निकाल लाए।
घर के खिड़की, दरवाजों से धुएं का गुबार निकल रहा था
आग इतनी भयावह थी कि घर के खिड़की, दरवाजों से धुएं का गुबार निकल रहा था। हसमत बेटे हमजा को बचाने के लिए दोबारा घर में जाना चाहते थे, लेकिन लोगों ने उन्हें पकड़ लिया। हसमत चिल्लाते रहे कि हमजा नहीं मिला, वो अंदर जा रहे हैं। लोगों ने किसी तरह उन्हें काबू किया और समझाया कि यदि अंदर गए तो जिंदा वापस नहीं लौटोगे।
हसमत बेटी माहिरा (6), बेटे फरहान (4), बेटी सोनी (15) और पत्नी को चादर में लपेटकर सीढ़ियों से किसी तरह नीचे आए। इस बीच उनके हाथ, सर के बाल और चेहरा झुलस गया। उनका साथ देने में सोनी भी लपटों की चपेट में आ गई। सोनी और हसमत को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
ड्यूटी जाने के लिए जाग रहे थे इसलिए बच गए
मुतिउर रहमान ड्यूटी पर जाने के लिए सुबह जग गए थे, इसलिए बच गए, लेकिन उनके साथ कमरे में सो रहे जहीदुल और फजलू चौधरी नहीं बच पाए। तीनों तीसरी मंजिल पर एक साल से कमरा किराए पर लेकर रह रहे थे। वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि ऊपरी मंजिल पर दर्जनभर लोग एक ही कमरे में रहते थे। अधिकतर लोग सुबह काम पर चले गए थे। रहमान पश्चिम बंगाल के मालदा टाउन से आकर यहां बैटरी रिक्शा चलाते हैं।
उनके साथी भी कोई बैटरी रिक्शा तो कोई पैर से चलाने वाला रिक्शा चलाकर गुजारा करते हैं। रहमान ने बताया कि जब आग लगी तो सभी गहरी नींद में सो रहे थे। उनका ड्यूटी पर जाने का समय हो गया था, इसलिए वो अचानक जग गए। कमरे में धुंआ भर गया है, कुछ दिखाई नहीं पड़ रहा था और दम घुट रहा था। चिल्लाकर बाकी साथियों को जगाया। उनके पीछे ताजूदास बचकर भागे, लेकिन जहीदुल और फजलू नहीं निकल पाए। आग बुझने के बाद पुलिस ने उनका शव अंदर से निकाला।