घंटाघर रामलीला मैदान में मंगलवार रात बड़ा हादसा टल गया। पिछले 11 दिनों से चल रही रामकथा के अंतिम दिन पंडाल में आग लगने से भगदड़ मच गई। हालांकि आधे घंटे बाद ही सि्थति नियंत्रण में कर ली गई। मौके पर पहुंची फायर बिग्रेड की पांच गाड़ियों ने आग पर काबू पाया।
घंटाघर रामलीला मैदान में 11 दिन से चल रहे श्री रामकथा महोत्सव में हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। श्री निताई गौर हरि संकीर्तन मंडल ट्रस्ट के आयोजन में गौर दास महाराज की कथा का मंगलवार को समापन था। रात करीब 10 बजे श्रीराम के राजतिलक की तैयारियां चल रहीं थीं।
बताया जाता है कि इस दौरान पंडाल में करीब पांच हजार श्रद्धालु मौजूद थे। पंडाल के सामने कुछ श्रद्धालु आतिशबाजी चला रहे थे। तभी मंच के सामने निकास द्वार पर पंडाल में आग लग गई। कुछ ही देर में पंडाल से ऊंची लपटें निकलने लगीं। इससे श्रद्धालुओं में हड़कंप मच गया और वे भ्ाागने लगे।
संचालकों ने स्थिति भांपते हुए तत्काल ही मंच से लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। इसके बाद संचालकों ने वालंटियर की मदद से पंडाल परिसर में फंसे सभी श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकाला, लेकिन तमाम लोगों के जूते-चप्पल मौके पर बिखरे मिले।
रामलीला मैदान के सामने स्थित कोतवाली से पुलिस और फायर ब्रिगेड की पांच गाड़ियां मौके पर पहुंची। एंबुलेंस को भी तत्काल बुलवा लिया गया। आधे घंटे की कोशिश के बाद आग पर काबू कर लिया गया।
आयोजक आग लगने का कारण शार्ट-सर्किट बता रहे हैं। जबकि कुछ श्रद्धालुओं का कहना है कि आग बाहर चल रही आतिशबाजी की चिंगारी से लगी।
बाहर दौड़े श्रद्धालु
पंडाल में मौजूद श्रद्धालु जान बचाने के लिए तत्काल बाहर की ओर दौड़ पड़े। ऐसे में पंडाल में लोगों के जूते-चप्पल बिखरे पड़े थे। महिलाएं अपने बच्चों को बाहर निकाल रहीं थीं, तो बुजुर्गों को दूसरी ओर से बाहर निकाला जा रहा था।
संयम से रही सुविधा
पुलिस और आयोजकों की मदद से श्रोताओं का संयम भी बड़े हादसे को टालने में मददगार रहा। वरना इतनी बड़ी भीड़ में भगदड़ से भी हादसा हो सकता था।
तत्काल मिली मदद
रामलीला मैदान के बिल्कुल सामने फायर ब्रिगेड होने से तत्काल गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं और आग को काबू कर लिया, यदि जरा भी देर होती तो आग पर काबू पाना आसान नहीं होता। पीने के लिए रखे गए पानी को भी लोगों ने आग पर फेंकना शुरू कर दिया।