औद्योगिक उपयोग के लिए दी गई जमीन निजी बिल्डर को बेचने पर मोदीपोन कंपनी के निदेशक व अन्य पर सोमवार को मोदीनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई। 65 एकड़ जमीन सरकार में निहित करने की कार्रवाई भी शुरू हो चुकी है। एफआईआर में डॉक्टर एमके मोदी व मनीष मोदी के नाम भी शामिल हैं।
क्या है मामला
उद्योग के लिए दी गई जमीन बिल्डर को बेचे पर शासन ने मैसर्स मोदीपोन कंपनी के प्रबंध निदेशक व अन्य पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे। मेरठ के पूर्व मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार की जांच रिपोर्ट पर शासन के विशेष सचिव ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी ने डीएम गाजियाबाद को आदेश दिया गया था कि वो कंपनी के एमडी पर तत्काल आईपीसी की संगत धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराए जाएं।
साथ ही 65.5366 एकड़ जमीन लीज डीड की धारा 4(सी) की शर्तों के तहत कंपनी से वापस लेकर राज्य सरकार में निहित कर ली जाए। इसमें 2.07 एकड़ कार्यालय परिसर की जमीन भी शामिल है।
मोदीपोन पर अवैधानिक तरीके से फैक्ट्री को बंद करने, कर्मचारियों को निकालने व जमीन बेचने के आरोप लगे थे। मामले में तत्कालीन मंडलायुक्त ने जांच कराई तो पाया गया कि कंपनी ने अपने फायदे के लिए फैक्ट्री को बंद जमीन को बेच कर करोड़ों रुपये कमाए।
जांच के आधार पर मंडलायुक्त ने कंपनी पर कानूनी कार्रवाई करने व जमीन राज्य सरकार में निहित करने की सिफारिश की। मंडलायुक्त की रिपोर्ट पर शासन ने 10 अगस्त 2018 को कारण बताओ नोटिस जारी किया, लेकिन कंपनी ने जवाब देनी की जगह हाईकोर्ट चला गई। जहां से उसे कोई स्टे नहीं मिल सका। अब शासन ने नोटिस का जवाब न देने पर कंपनी के ऊपर कड़ी कार्रवाई का आदेश देते हुए डीएम से अविलंब कार्यवाही की आख्या उपलब्ध करने को कहा है।