साहिबाबाद के ड्रेन नंबर -1 के निरीक्षण के लिए एक्सपर्ट न नियुक्त किए जाने पर एनजीटी ने केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय पर 10 हजार रुपये की पेनाल्टी लगाई है। एनजीटी ने महाराजपुर के समाजसेवी हाजी आरिफ की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया है।
दरअसल, साहिबाबाद के सबसे बड़े ड्रेन को निजी कंपनियों द्वारा कवर करने और नाले में दीवार खड़ी किए जाने से बहाव रुक रहा है। हाजी आरिफ ने एनजीटी में जनहित याचिका दाखिल कर नगर निगम, जीडीए, वन एवं पर्यावरण मंत्रालय समेत छह सरकारी विभागों को पार्टी बनाया था।
बीते 3 मार्च को कोर्ट ने इसमें एडवोकेट पारुल गुप्ता के नेतृत्व में कमेटी बनाकर नाले का भौतिक सत्यापन करने के आदेश दिए थे। 31 मार्च तक कमेटी को एनजीटी में रिपोर्ट दाखिल करनी थी। कमेटी में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय का एक एक्सपर्ट भी शामिल होना था। लेकिन मंत्रालय ने किसी को नियुक्त ही नहीं किया।
पिछले सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान पारुल गुप्ता की ओर से एनजीटी को एक्सपर्ट नियुक्त न होने की जानकारी दी गई, तो कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताई। एनजीटी ने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय पर 10 हजार रुपये पेनल्टी लगाई है। एडवोकेट पारुल गुप्ता ने बताया कि अब मामले की अगली सुनवाई 4 अप्रैल को होगी।
पर्यावरण नियामक के गठन को मांगा 6 माह का वक्त
पर्यावरण संबंधी कानूनों को लागू करने और उल्लंघन होने पर जुर्माना लगाने के लिए नियामक गठित करने के लिए केंद्र सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट से छह माह का समय मांगा है। पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट के छह जनवरी के आदेश के तहत छह माह का और समय मांगा है। मंत्रालय ने कहा कि उसने नियामक के गठन का प्रारूप संबंधित मंत्रालयों तथा विभागों को भेज दिया है। उनके कमेंट आने पर इसे कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेज दिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट में दायर अर्जी में मंत्रालय ने कहा है कि कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही नियामक को केंद्र और राज्य स्तरीय कर्मचारियों की जरूरत पर विचार किया जाएगा। अर्जी में यह भी कहा गया है कि नियामक को दंड प्रदान करने के अधिकार प्रदान नहीं किए जा सकते।
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत प्रदूषण फैलाने वालों पर जुर्माना तथा अन्य सजाएं देने का अधिकार सिर्फ अदालतों को है। अधिनियम में सिविल पेनाल्टी का प्रावधान भी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने छह जनवरी के अपने आदेश में सरकार को एक राष्ट्रीय नियामक बनाने का आदेश दिया था। इसकी शाखाएं राज्यों में स्थापित करने के लिए भी कहा था। अदालत ने 31 मार्च तक का सरकार को समय दिया था अनुपालन रिपोर्ट सात अप्रैल तक दायर करने का निर्देश दिया था।