दो थानों के चक्कर में 22 वर्षीय युवक का शव 30 घंटे तक पोस्टमार्टम के लिए पड़ा रहा। परिवार के सदस्य शव लेकर रात भर जिला अस्पताल और उसके बाद पोस्टमार्टम हाउस के सामने बैठे रहे।
दरअसल, सदरपुर निवासी सचिन (22) को करंट लगी थी। सोमवार सुबह 9:30 बजे परिवार के सदस्य सचिन को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। उधर, जल्दबाजी में अस्पताल की इमरजेंसी में मृतक का पता सदरपुर की जगह निठारी गांव लिख दिया गया।
मृतक के भाई हेमराज ने बताया कि पता निठारी गांव लिखे जाने से अस्पताल प्रशासन ने करंट लगने से मौत की जानकारी सेक्टर-20 पुलिस को दे दी। अस्पताल पहुंचने पर पुलिस को पता चला कि सचिन सदरपुर निवासी है, तो सेक्टर-20 पुलिस परिवार को इसे अपने क्षेत्र का मामला न होने की जानकारी देकर चली गई।
इसके बाद परिवार वाले सेक्टर-39 थाना पुलिस का इंतजार करते रहे, क्योंकि सदरपुर सेक्टर-39 पुलिस थाने के अंतर्गत आता है। काफी देर इंतजार के बाद परिवार के सदस्यों ने खुद पुलिस से संपर्क किया, तब सेक्टर-39 थाने की पुलिस आई। इस कारण प्रक्रिया पूरी होने में शाम के 6 बज गए।
नियम के मुताबिक शाम को पोस्टमार्टम नहीं होता। इस वजह से शाम 6 बजे तक परिवार के सदस्य सचिन का शव लेकर जिला अस्पताल में ही बैठे रहे। इसके बाद रात को पोस्टमार्टम हाउस लेकर गए, जहां मंगलवार दोपहर 2 बजे के करीब पोस्टमार्टम हुआ। वहीं, मामले में सीएमएस से बात करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने कहा कि वेे अभी बाहर हैं, जबकि सीएमओ ने फोन नहीं उठाया।
घायल को अस्पताल में छोड़कर चली गई पुलिस
सेक्टर-9 में मंगलवार दोपहर एक शख्स का एक्सीडेंट हो गया। जानकारी मिलने पर पुलिस घायल को जिला अस्पताल में लेकर पहुंची। पुलिस को घायल के पास मोबाइल मिला। मोबाइल से पीड़ित के परिजनों का पता लगाने की बजाय पुलिस ने ड्यूटी पर तैनात फार्मासिस्ट को ही मोबाइल थमा दिया।
साथ ही कहा कि अगर फोन आए, तो इसके एक्सीडेंट के बारे में जानकारी दे देना और पुलिस चली गई। पुलिस ने पीड़ित के परिजनों का पता लगाना भी जरूरी नहीं समझा, जबकि शख्स की हालत इतनी गंभीर थी कि उसे दिल्ली के अस्पताल में रेफर करना पड़ा। ब्यूरो