डेंगू का खौफ दिखाकर प्राइवेट अस्पताल मरीजों को लूट रहे हैं। मामूली बुखार को भी डेंगू बताकर अस्पताल में भर्ती किया जा रहा है। जबकि स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में ऐसे मरीजों को डेंगू की पुष्टि नहीं हो रही है।
प्राइवेट अस्पतालों की ओर से पिछले 20 दिन में स्वास्थ्य विभाग को भेजे गए 300 में से 100 सैंपल ऐसे हैं, जिनमें डेंगू निगेटिव आया है। जबकि प्राइवेट अस्पताल और निजी लैब ने इनमें डेंगू की पुष्टि कर दी थी।
बाकी 200 में से कुछ को वायरल, टायफाइड या मलेरिया के लक्षण हैं। ऐसे अस्पतालों और निजी लैब को अब स्वास्थ्य विभाग नोटिस भेजेगा। बता दें कि अब तक स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू के सिर्फ 60 मरीजों की ही पुष्टि की है।
डीएमओ डा. जीके मिश्रा ने बताया कि हर रोज शहर से 40 से 50 सैंपल लिए जा रहे हैं, जबकि तीन से पांच मरीजों को ही डेंगू की पुष्टि हो रही है। रिपोर्ट में अस्पताल वाले डेंगू पॉजिटिव होने की रिपोर्ट लिखित में नहीं देते।
रिपोर्ट में प्लेटलेट्स काउंट होता है, जिसे दिखाकर मौखिक तौर पर मरीज को डेंगू बता दिया जाता है। अब तक गाजियाबाद में करीब 500 सैंपल की जांच हुई, जिसमें सिर्फ 60 मरीजों में डेंगू की पुष्टि की है।
सीएमओ डा. अजेय अग्रवाल बताते हैं कि प्लेटलेट्स कम होने का मतलब डेंगू नहीं होता है। उन्होंने बताया कि प्लेटलेट्स यदि 10 हजार तक भी हैं तो मरीज को जंबो पैक की जरूरत नहीं है।
सही उपचार व लिक्विड डाइट से चौबीस घंटे के भीतर प्लेटलेट्स बढ़ाई जा सकती हैं। अमूमन 50 से 60 हजार प्लेटलेट्स होने पर ही लोग घबरा जाते हैं।
इसी घबराहट का फायदा निजी अस्पताल उठाते हैं। ऐसे में जरूरी है कि लोग खुद भी सतर्कता बरतें और झांसे में न आएं।