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नोएडाः एपीजे-कैम्ब्रिज समेत 14 स्कूलों पर कार्रवाई, 24 घंटे में बढ़ी फीस नहीं लौटाई तो मान्यता रद्द

Sat, 20 Apr 2019 10:10 PM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा
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बढ़ी फीस के विरोध में प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला
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मनमानी फीस वृद्धि के कारण एपीजे स्कूल पर जुर्माने की राशि को एक लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख कर दिया गया है। जबकि कैंब्रिज स्कूल पर एक  लाख रुपये का जुर्माना किया गया है। जबकि रॉयन स्कूल को सोमवार तक की मोहलत दी गई है। सभी स्कूलों को चेताया गया है कि अगर स्कूलों ने 24 घंटे में बढ़ी फीस वापस नहीं की तो उनके खिलाफ प्रदेश सरकार के माध्यम से सीबीएसई को पत्र लिखकर मान्यता खत्म कराने की मांग की जाएगी। जिलाधिकारी बीएन सिंह ने शनिवार को नोएडा सेक्टर-27 स्थित कैंप आफिस में आयोजित प्रेसवार्ता में यह जानकारी दी।

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उन्होंने बताया कि अभिभावकों द्वारा जिले के नामचीन स्कूलों के खिलाफ मध्य शैक्षिक सत्र में फीस बढ़ाने की शिकायत दी गई थी। कई स्कूलों ने गलत तरीके से फीस बढ़ाकर अधिनियम का उल्लंघन किया है। ऐसे में कार्रवाई शुरू कर दी गई है। एपीजे स्कूल पर पहले एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। अब ग्रेटर नोएडा डीपीएस, नोएडा के रॉयन, कैंब्रिज, खेतान, बिल्लाबांग, कोठारी, फादर एग्नल, मॉर्डन समेत 14 स्कूलों की शिकायत आई है।

इन सभी की फीस समिति जांच कर रही है। गलत तरीके से फीस बढ़ाने वाले स्कूलों को चेतावनी दी गई है कि 24 घंटे में फीस वापस करके समिति को सूचना दें। अगर ऐसा नहीं करते हैं तो कार्रवाई होगी। एपीजे ने समिति की बात नहीं मानी थी और ऊपर जाकर अपील की थी। वहां से भी उनको मदद नहीं मिली। फिर भी स्कूल प्रबंधन ने समिति के निर्देश का पालन नहीं किया था। ऐसे में स्कूल पर 1 लाख की जगह 5 लाख रुपये का जुर्माना किया गया है।

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स्कूल प्रबंधन व अभिभावकों पर मुचलके की कार्रवाई
जिलाधिकारी ने साफ शब्दों में चेताया कि फीस बढ़ोतरी के खिलाफ अभिभावक आंदोलन कर रहे हैं। इससे शांति व्यवस्था गड़बड़ा सकती है। ऐसे में नियमों के खिलाफ फीस बढ़ाने वाले स्कूूल प्रबंधकों और प्राचार्य के खिलाफ मुचलके की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। वहीं, कुछ अभिभावकों पर भी इस तरह की कार्रवाई की जा रही है, ताकि कानून व्यवस्था प्रभावित न हो। अगर ऐसा होता है तो स्कूल प्रबंधन के खिलाफ और सख्त कार्रवाई होगी। साथ ही, अभिभावकों से भी कहा गया है कि वह शांति व्यवस्था बनाए रखें।

स्कूल में यूनिफार्म और किताब खरीदने के लिए बाध्यता नहीं
जिलाधिकारी ने बताया कि खेतान स्कूल में संस्कृत की 70 रुपये की पुस्तक को 400 रुपये में बेचने का मामला प्रकाश में आया था। इसकी जांच कराई जा रही है और स्कूलों से लिए जा रहे शपथ पत्र में यह बात शामिल है कि वह एक जगह या स्कूल में यूनिफार्म व किताब खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकते हैं। उनको ऐसी व्यवस्था करनी होगी जिससे स्कूलों की मनमानी न हो पाए। साथ ही, मध्य शैक्षिक सत्र में कोई भी स्कूल फीस नहीं बढ़ा पाएगा।

फीस की शिकायत पहले स्कूल में करें और फिर समिति से
डीएम ने अभिभावकों से अपील की है कि अगर स्कूल मध्य शैक्षिक सत्र में फीस बढ़ाता है तो सबसे पहले स्कूल के समक्ष ही शिकायत की जाए। अगर स्कूल उनकी बात न सुने या कोई कार्रवाई न करे तो 15 दिन बाद जिला शुल्क नियामक समिति के समक्ष शिकायत करें। स्वयं आंदोलन या किसी तरह से उग्र होकर काम न करें। अगर ऐसा किया जाता है तो अभिभावकों पर भी कार्रवाई होगी।
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स्कूल भेजेंगे अभिभावकों को पत्र
स्कूल और अभिभावकाें के बीच समन्वय बनाने के लिए अब प्रबंधन की ओर से पत्र भेजकर हर तरह की सूचना दी जाएगी। साथ ही, फीस कितनी और किस मद में किसी निर्देश से बढ़ाई है। इसकी भी जानकारी अभिभावकों को स्कूल देंगे। जिलाधिकारी ने कहा कि स्कूलों के साथ बैठक की गई जिसमें उनसे अपील की गई है कि वह अभिभावकों के साथ मित्रवत संबंध बनाएं और अगर उनको कोई समस्या है तो तुरंत उसे दूर कराएं। स्कूल व अभिभावकों का आपस में समन्वय बनाने के लिए भी प्रयास करने के लिए कहा गया है।

डीएम की कार्रवाई से अभिभावक खुश
ऑल इंडिया एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने शनिवार को डीएम आफिस पहुंचकर जिला प्रशासन और फीस समिति की कार्रवाई पर खुशी जताई है। पदाधिकारियों ने कहा कि अभी और स्कूलों पर कार्रवाई होनी चाहिए। जिलाधिकारी की कार्रवाई से वह संतुष्ट हैं और आगे भी इसी तरह की कार्रवाई चाहते हैं। इस दौरान मनोज कटारिया समेत काफी अभिभावक मौजूद रहे।
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