अपराध शाखा के पुलिस उपायुक्त आदित्य गौतम ने बताया कि दोषी हमीदुल्लाह, दिल्ली के पुराने मुस्तफाबाद का निवासी था और पांच बेटियों का पिता था। अपनी पत्नी की मृत्यु के बाद, वह अपनी तीन नाबालिग बेटियों के साथ अकेला रह रहा था, क्योंकि अन्य दो बेटियों की शादी पहले ही हो चुकी थी। एक लड़की ने गोकुलपुरी थाने में 30 जुलाई, 1999 को रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसके पिता ने उसे और उसकी दो छोटी बहनों को जहर देने का प्रयास किया है।
उसने बताया कि पिछली रात 29 जुलाई 1999 की रात लगभग 10.30 बजे उसके पिता घर लौटे और उसे तीन कैप्सूल दिए। कैप्सूल बाहर से नीले और अंदर से सफेद दिख रहे थे। पिता ने उससे कहा कि वह एक खा ले और बाकी दो अपनी बहनों को दे दे। चूंकि उसे केवल पेट दर्द था, इसलिए जब उसने जरूरत पर सवाल उठाया, तो पिता ने जिद की और खुद कैप्सूल छोटी लड़कियों के मुंह में रख दिए।
शिकायतकर्ता ने कैप्सूल निगलने का नाटक किया, लेकिन उसे अपनी जीभ के नीचे छिपा लिया। इसके तुरंत बाद दोनों छोटी बहनों में सांस लेने, मुंह से झाग निकलने जैसे ज़हर खाने के लक्षण दिखाई दिए। वह पड़ोसियों से मदद मांगने के लिए दौड़ी। लौटने पर, उन्होंने पाया कि पिता फरार हो गया था। पीडि़त लड़कियों को अस्पताल ले गया, जहां दोनों को मृत घोषित कर दिया गया। पुलिस ने उसके पिता को 31 जुलाई,1999 को गिरफ्तार कर लिया था।
दोषी ठहराया गया
दोषी हमीदुल्लाह पर अपनी तीन नाबालिग बेटियों को मारने के इरादे से जहर देने का मुकदमा चलाया गया और उसे दोषी ठहराया गया। दोषी को बाद में पैरोल दी गई, लेकिन वह फरार हो गया और पैरोल अवधि समाप्त होने पर जेल नहीं लौटा। शाखा में तैनात इंस्पेक्टर सतेंद्र पूनिया व इंस्पेक्टर सोहन लाल बिजारनिया की टीम आरोपी की तलाश कर रही थी। जांच के बाद दोषी को लोनी, गाजियाबाद से गिरफ्तार कर लिया गया। फिलहाल वह लोनी, गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) में रह रहा है।