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हेलीकॉप्टर हादसे में खो दिए पिता और बहन, रह गई आखिरी निशानी

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नरेला के पूंठगांव से वैष्णो देवी के दर्शन करने गए सचिन के चार साल के बेटे ने पिता के हेलीकाप्टर पर चढ़ने से पहले बातचीत करने के लिए उनका मोबाइल फोन ले लिया था।
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उसे क्या पता था कि यह उसके पिता की आखिरी निशानी है। इस दुर्घटना के बाद से सचिन के गांव में मातम का माहौल है और यहां रहने वाले दुख की इस घड़ी में सचिन के परिवार को सांत्वना दे रहे हैं।

गुड़गांव डीएलएफ फेज-3 में रहने वाले उनके ससुर जगदीश सोलंकी ने बताया कि हाल ही में एक मन्नत पूरी होने के बाद सभी लोग दर्शन के लिए गए थे।

सचिन की मां और छोटा भाई गांव में ही रुक गए

पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर सचिन अपनी पत्नी प्रिया, चार साल के बेटे और पांच साल की बेटी अक्षिता, पिता और ससुर सहित परिवार के सात लोगों के साथ शनिवार को वैष्णो देवी की यात्रा लिए दिल्ली से ट्रेन द्वारा रवाना हुए थे।

सचिन की मां और छोटा भाई गांव में ही रुक गए थे। सचिन के परिवार वालों के मुताबिक, पूरा परिवार दोपहर में हेलीकॉप्टर का इंतजार कर रहा था।

इसमें दो लोगों के बैठने की जगह थी। सचिन अपनी बेटी के साथ उसमें बैठ गए। इसी दौरान उसके चार साल के बेटे ने पिता ने मोबाइल फोन ले लिया।
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हादसे में पायलट समेत सात लोगों की मौत

परिवार के पांच लोग दूसरे हेलीकॉप्टर का इंतजार करने लगे। हेलीकॉप्टर उड़ने के कुछ देर बाद ही क्रैश हो गया। जिसमें पायलट समेत सात लोगों की मौत हो गई।

परिवार वालों के मुताबिक, सचिन गुड़गांव की एक सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करता था। उसकी पत्नी प्रिया सरकारी स्कूल में टीचर है। वहीं बेटी अक्षिता रोहिणी के एक  प्राइवेट स्कूल में पहली कक्षा में पढ़ती थी।

सचिन के गांव वाले इस हादसे की सूचना मिलने के बाद तुरंत घर पहुंचे। जहां सचिन की मां का रो रो कर बुरा हाल है। गांव वालों ने बताया कि सचिन काफी समझदार था। वह एक अच्छा खिलाड़ी भी था।
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