इंडस्ट्रीयल मॉडल टाउन (आईएमटी) के किसान एक बार फिर से आंदोलन शुरू करने के मूड आ गए हैं। रविवार को किसानों ने अपनी मांगों को लेकर महापंचायत की और हरियाणा राज्य औद्योगिक संरचना विकास निगम (एचएसआईआईडीसी) को 20 अप्रैल तक समय दिया।
किसानों का कहना है कि यदि निर्धारित समय सीमा के दौरान मुआवजा नहीं दिया तो वे दोबारा आंदोलन करने पर उतारू होंगे। आईएमटी के विकास कार्यों को रोक दिया जाएगा।
दरअसल, एचएसआईआईडीसी ने चंदावली, नवादा तिगांव, मुजैड़ी, मच्छगर, सोतई और ऊंचा गांव की 1832 एकड़ भूमि 2008 में आईएमटी विकसित करने के लिए अधिग्रहण की थी।
तब विभाग ने किसानों को मुआवजा 16 लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से दिया था। यह मुआवजा काफी कम था। मुआवजा बढ़ाने की मांग को लेकर किसानों ने 30 अगस्त-2009 में आईएमटी में ही धरना शुरू कर दिया।
यह धरना 10 मार्च-2010 तक चला। इस दौरान किसानों और प्रशासन के बीच एक समझौता हुआ था। इस समझौते के अनुसार किसानों को 42 लाख रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने और पुनर्वास नीति के तहत रिहायशी प्लॉटों की साइट को पूरी तरह से एचएसआईआईडीसी को तैयार करके देना था।
आईएमटी में लगने वाले उद्योगों में इन गांवों के युवाओं को नौकरी प्राथमिकता पर देनी थी। समझौते में 14 मांगें शामिल की गई थीं। प्रशासन ने तब मुआवजा तो 42 लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से दे दिया।
किसान इस मामले को लेकर हाईकोर्ट चले गए। अब किसान मुआवजे के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। एचएसआईआईडीसी के रुख को देखकर किसानों में गुस्सा है। किसानों ने एक बार फिर आंदोलन की राह पकड़ने का निर्णय लिया है।
महापंचायत की अध्यक्षता जयपाल सूबेदार ने की, जबकि संचालन किशन धनखड़ ने किया। करीब तीन घंटे चली महापंचायत में वक्ताओं ने एचएसआईआईडीसी में व्याप्त भ्रष्टाचार की जमकर परत खोली।
किसानों ने बताया कि विभागीय अधिकारी बिना रिश्वत किसानों को मुआवजा वितरित नहीं करते। जमीन देने के बावजूद उन्हें सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
महापंचायत में चंदावली, नवादा तिगांव, मुजैड़ी, मच्छगर, सोतई और ऊंचा गांव के किसानों के अलावा मेवात किसान संघर्ष समिति, ईस्टर्न फेरिफेरल किसान संघर्ष समिति और हरियाणा किसान संघर्ष समिति के सैकड़ों किसानों ने हिस्सा लिया।
समझौते के अनुसार एचएसआईआईडीसी को पुनर्वास नीति के तहत दिए जाने वाले प्लॉटों की साइट को तैयार करके देना था। अभी तक विभाग ने प्लॉट नहीं दिए हैं। विभाग वायदाखिलाफी पर अड़ा हुआ है। इसे किसान बर्दाश्त नहीं करेगा।- रामनिवास नागर, अध्यक्ष आईएमटी किसान संघर्ष समिति
जब किसानों ने अपनी जमीन सस्ते में सरकार को दी है तो एचएसआईआईडीसी अपने कॉलम में यह प्रावधान क्यों नहीं करती कि यहां लगने वाले सभी उद्योगों में स्थानीय युवाओं को वरीयता मिले।- डीके शर्मा, हरियाणा किसान संघर्ष समिति
अभी तक हरियाणा राज्य औद्योगिक संरचना विकास निगम ने हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार मुआवजा भी नहीं दिया है और न ही प्रशासन ने किसानों के साथ हुए समझौते को लागू किया है। यह सरासर धोखा है।
- गिर्राज धनखंड, गांव मच्छगर
प्रशासन और किसानों के बीच समझौता हुआ था कि आईएमटी में जिन किसानों की जमीन अधिग्रहीत होगी। उन प्रभावित परिवारों के बच्चों को योग्यता के आधार पर विभिन्न उद्योगों में नौकरी दी जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं रहा।- जीतराम, फोरमैन, गांव चंदावली
रिलीज प्लॉट की मुटेशन के लिए किसानों से जबरदस्ती फीस ली जा रही है। जबकि समझौते में फीस का जिक्र नहीं था।
- जग्गी पूर्व सरपंच, मुजैड़ी
डेढ़ साल बाद भी एचएसआईआईडीसी पर किसानों का 11 सौ करोड़ रुपये बकाया है। किसान कई बार अर्जी दे चुके हैं, लेकिन विभागीय अधिकारी सुनने के लिए तैयार नहीं हैं। - कन्हैया, गांव मच्छगर