सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शनकारी किसानों को हटाने की मांग वाली याचिकाओं में आठ किसान यूनियनों के निहितार्थ की अनुमति दी।
मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे और जस्टिस एएस बोपन्ना और वी रामासुब्रमण्यम की खंडपीठ ने किसानों का संगठन बनाने की अनुमति दी। कल इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में होगी।
चिल्ला बॉर्डर पर किसान सोते देखे गए वहीं एक सांड वहीं बैठा दिखाई दिया तो लोग कहने लगे कि किसान तो सो रहे हैं लेकिन सांड यहां पूरी तरह मुस्तैद है।
केंद्रीय वाणिज्य राज्य मंत्री सोम प्रकाश ने सुप्रीम कोर्ट के कमेटी बनाने के फैसले पर खुशी जताते हुए उसका स्वागत किया है और कहा कि हम भी किसानों का मुद्दा जल्द सुलझाना चाहते हैं। इस कमेटी में किसान और सरकार अपनी राय रखेंगे जो अच्छा है। कल सुप्रीम कोर्ट जो भी फैसला करेगी हम उसके मुताबिक बात करेंगे।
ग्वालियर में आयोजित किसान सम्मेलन में कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा जब किसानों को गुमराह किया जा रहा है और पंजाब के किसान देश के एक कोने में आंदोलन कर रहे हैं तो आप किसान भाई रीवा, सागर, ग्वालियर, उज्जैन और अन्य जगहों पर नरेंद्र मोदी सरकार के कृषि कानूनों का समर्थन कर रहे हैं। मैं आप सभी का धन्यवाद करता हूं।
सुप्रीम कोर्ट में आज आंदोलन को लेकर सुनवाई हुई जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी बनाने का इशारा किया है। इसके बाद प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों ने आपात बैठक बुलाई है जिसमें वह अपनी आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे।
यूपी गेट पर आज शाम करीब 4.00 बजे किसानों ने बैरिकेड पर चढ़कर दिल्ली में घुसने की कोशिश की है।
विजय दिवस के अवसर पर गाजीपुर बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों को पूर्व सैनिकों का भी साथ मिला है। यूपी गेट पर पूर्व सैनिकों के वेटरन्स एसोसिएशन ने किसानों के साथ राष्ट्रीय गान गाया।
किसानों यूनियन का अंबावत गुट आज चिल्ला बॉर्डर पर पहुंचा। यहां उन्होंने गुरुवार से चिल्ला बॉर्डर पर दिल्ली से नोएडा आने वाले रास्ते को भी बंद करने का एलान किया है।
सिंघु बॉर्डर पर कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे किसानों के लिए पेट्रोल पंप को टेंट सिटी में बदला गया। एक प्रदर्शनकारी ने बताया कि, 'हमारी कंडीशन देख कर फाउंडेशन वालों ने ये टेंट लगवाए। इनमें अब ठंड नहीं लगती। इसके लिए कोई पैसा नहीं लिया जाता। इसका सारा रख रखाव यही करते हैं।'
सुप्रीम कोर्ट में किसान आंदोलन को लेकर दायर तीन याचिकाओं की सुनवाई शुरू हो चुकी है। इसमें से एक याचिका में प्रदर्शनकारी किसानों को रास्ते से हटाने के लिए भी याचिका है।
दिल्ली-नोएडा (चिल्ला बॉर्डर) बॉर्डर बंद होने के कारण अब नोएडा से दिल्ली जाने के लिए इस्तेमाल होने वाले डीएनडी और सराय काले खां के रास्ते पर लंबा जाम लग गया है। अब तक यहां नोएडा से दिल्ली जाने वाले दो लेन खुले थे लेकिन अब किसानों ने अपना प्रदर्शन तेज करते हुए दिल्ली जाने वाली सभी लेन बंद कर दी है।
चिल्ला बॉर्डर पर 15 दिन से ज्यादा समय से प्रदर्शन कर रहे भारतीय किसान यूनियन (भानु) के किसानों ने आज चिल्ला बॉर्डर को पूरी तरह से दिल्ली जाने के लिए बंद कर दिया है। दरअसल चिल्ला बॉर्डर पर दिल्ली जाने वाली चार में से दो लेन खुली थी लेकिन आज किसानों ने उन दो लेन को भी बंद कर प्रदर्शन शुरू कर दिया है।
किसान आंदोलन भी टुकड़े- टुकड़े में अब ‘समझौते’और ‘संघर्ष’ की दिशा में बढ़ चला है। आंदोलन से जुड़े कई संगठन नए सिरे से बातचीत का मन बना रहे हैं, वहीं संयुक्त मोर्चा के नाम पर पंजाब की जत्थेबंदियों ने एकजुट आंदोलन को और तेज करने का फैसला किया है।
किसान कानूनों के विरोध के लिए यूपी की अलग-अलग जगहों से आए पूर्व सैनिक गाजीपुर बॉर्डर पहुंचे। पूर्व सैनिक संगठन से सूबेदार रहे जे.पी. मिश्रा ने बताया कि ओडिशा से भी और लोग आज आ रहे हैं। साढ़े 10 बजे तक लगभग 200 लोग आ जाएंगे। किसानों के साथ अब संत और सैनिक समाज दोनों खड़े हैं।
किसान नेता ऋषिपाल ने कहा, जब से आंदोलन शुरू हुआ है हर दिन औसत एक किसान भाई की जान जा रही है। अब तक 20 किसान इस आंदोलन में शहीद हुए हैं। हम सब इन किसानों के सम्मान में 20 दिसंबर को श्रद्धांजलि दिवस के तौर पर मनाएंगे और देश भर के गांवों और तहसील मुख्यालयों पर 20 दिसंबर को सुबह 11 बजे से दोपहर 01 बजे तक श्रद्धांजलि दी जाएगी।
केंद्र के तीन कृषि सुधार कानूनों के खिलाफ 21 दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसानों ने मंगलवार को सख्त संदेश दिया कि वह किसी भी हाल में सरकार को तीनों कानून वापस लेने पर मजबूर करेंगे। किसान आज चिल्ला बॉर्डर जाम करेंगे और आने वाले दिनों में आंदोलन को और बड़ा किया जाएगा।
कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली बॉर्डर पर हो रहे किसानों के आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई होगी। दायर याचिका में कहा गया है कि धरना-प्रदर्शन से आम लोगों को भारी परेशानी हो रही है। आज सुप्रीम कोर्ट मामले की सुनवाई करेगा। चीफ जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस ए एस बोपन्ना और जस्टिस वी रामसुब्रमण्यम की बेंच सुनवाई करेगी। सुप्रीम कोर्ट में तीन याचिकाएं दाखिल की गई हैं।