आप नेता संजय सिंह ने कहा कि सरकार यह काला क़ानून अपने दो मालिकों के लिए लेकर आई है। एक का नाम है अडानी और दूसरे का नाम है अंबानी। यह क़ानून देश के किसानों के हित के लिए नहीं है।
आप नेता संजय सिंह ने कहा कि पूरा देश इस वक्त किसानों के आंदोलन के साथ है। दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा है कि हम सड़क से लेकर संसद तक किसानों के आंदोलन में उनका साथ देंगे। हमने इस बिल का सबसे पहले संसद के अंदर विरोध किया था।
सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने केंद्रीय कृषि मंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि अगर किसानों के मुद्दों को हल नहीं किया गया तो वे केंद्र सरकार के खिलाफ भूख हड़ताल करेंगे।
सपा अध्यक्ष ने कहा कि BJP उन किसानों की सूची जारी करे जिन किसानों को उन्होंने धान और मक्का का समर्थन मूल्य दिया है। BJP बताए कि कितने किसानों के गन्ने का पैसा बकाया है। इन सवालों के जवाब बीजेपी नहीं देना चाहती है इसलिए अपने बड़े-बडे़ नेताओं को झूठ फैलाने के लिए जनता के बीच पहुंचा दिया है।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि आज देश में बीजेपी प्रेस वार्ता करके समझाना चाहती है कि दिल्ली में जो कृषि क़ानून पास हुए हैं, वह किसानों के हित के लिए हैं। अगर यह किसानों के हितों के लिए थे तो इतने बड़े पैमाने पर किसान धरने पर क्यों बैठे हैं?
भाजपा नेता संबित पात्रा ने राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राहुल जी किसानों को भ्रमित करने के लिए बार-बार ट्वीट कर रहे हैं। राहुल जी कितना समझते हैं किसानी को! हां, माना उनके जीजा जी किसान हैं। आपको अंदर की बात बताता हूं कि रबी और खरीफ को वे BJP कार्यकर्ता समझते हैं। उन्हें तो यह पता भी नहीं कि यह फसलों का नाम है।
दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर पर ओडिशा से कृषि कानूनों का विरोध करने आए किसान सिंघु बॉर्डर पहुंचे। कानूनों का विरोध करने के लिए एक प्रदर्शनकारी ने अपना सिर मुंडवाया।
कृषि कानूनों के खिलाफ जयसिंहपुर खेड़ा (राजस्थान-हरियाणा) बॉर्डर पर पपेट शो के माध्यम से विरोध प्रदर्शन किया गया। ऑल इंडिया किसान सभा और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के सदस्य भी कृषि कानूनों के खिलाफ जारी प्रदर्शन में शामिल हुए।
सिंघु बॉर्डर पर भूख हड़ताल पर बैठे किसानों ने पानी पीकर और फल खाकर अपना उपवास खत्म किया।
किसान नेता राकेश टिकैत ने आज शाम प्रेस वार्ता कर कहा कि आज जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन और यूपी गेट पर अनशन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। उन्होंने चेतावनी दी कि पुलिस प्रशासन अगर किसानों की ट्रॉलियों को रोकेगा तो पूरा एक्सप्रेसवे जाम कर देंगे। किसानों को प्रताड़ित किया गया तो थानों में पशुओं को बांध देंगे। उन्होंने कहा कि अभी वार्ता के लिए सरकार की तरफ से कोई प्रस्ताव नहीं आया है, जब भी बात होगी तो कृषि कानून वापस लेने पर ही। उन्होंने कहा कि कल के बाद अगले कार्यक्रम की घोषणा होगी।
चिल्ला बॉर्डर से किसान नेता भानु प्रताप सिंह ने कहा कि एमएसपी जिसके लिए लड़ाई चल रही है वो तो हम बनाएंगे, किसान आयोग बनाएगा। सरकार जो एमएसपी बनाती रही है 72 सालों से उससे तो हम बर्बाद हो गए। उससे हमें लाभांश और लागत मूल्य नहीं मिल रहा है। भारत के सभी किसान नेताओं की सीबीआई जांच होनी चाहिए। चाहे वो पंजाब के हों या हरियाणा के, चाहे वो राकेश टिकैत हो या मैं। इनके सारे प्रतिष्ठानों पर ताले पड़ जाने चाहिए कल से। तभी सरकारें किसानों की मांगें पूरी कर पाएंगी।
दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि, आज किसानों के समर्थन में पूरा देश है, देश का किसान इन तीन काले कानूनों से डरा हुआ है क्योंकि इनके लागू होने के बाद उसकी जिंदगी में भूचाल आ गया है। जब किसान सड़कों पर विरोध में है तो ये उसे देश की सुरक्षा के लिए खतरा, नक्सली बोल रहे हैं।
कृषि भवन में आज हरियाणा के सांसद और विधायक कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर से मिले। इससे पहले उनसे दस किसान संगठनों के नेता भी मिले और कृषि कानूनों को अपना समर्थन दिया था। कृषि मंत्री तोमर ने इन मुलाकातों के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि, कई राज्यों के किसान यूनियन मिलने आए थे। उन्होंने कहा कि वह सरकार का समर्थन करते हैं और मोदी सरकार हमेशा ही किसानों के भले के लिए काम करती रही है।
उत्तर प्रदेश, केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना, बिहार और हरियाणा के दस किसान संगठन जो ऑल इंडिया कॉर्डिनेशन कमेटी से जुड़े हैं उनके नेता कृषि मंत्री तोमर से मिले और उन्हें कृषि कानून पर अपना समर्थन दिया।
उत्तर प्रदेश के एडीजी (कानून-व्यवस्था) प्रशांत कुमार ने कहा कि, कुछ ऐसे आपराधिक तत्व हैं जो किसान आंदोलन की आड़ में कुछ गड़बड़ी फैलाना चाहते हैं, ऐसे लोगों पर प्रशासन स्थानीय स्तर पर कार्रवाई कर रहा है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कृषि कानूनों के बचाव में कहा कि कृषि एक ऐसा क्षेत्र था जो कोरोना के दुष्प्रभाव से बचा हुआ था और ये सबसे बेहतर निकला। हमारी पैदावार अच्छी हुई और हमारे गोदाम भी अन्न से भरे हुए हैं। हमारे कृषि क्षेत्र के खिलाफ कोई कदम उठाने के बारे में सोच भी नहीं सकते। हाल के जो भी कृषि सुधार हुए हैं वो सब किसानों के हित में हैं।
गाजियाबाद में किसानों के समर्थन में जन अधिकार पार्टी ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। यही नहीं किसानों के समर्थन में सीपीआईएम के कार्यकर्ता भी कलेक्ट्रेट दफ्तर पहुंचे। समाजवादी पार्टी के नेता भी कलेक्ट्रेट दफ्तर के बाहर पहुंचकर धरना दे रहे हैं।
कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने आज कहा है कि मैं किसानों से अपील करता हूं कि वह सरकार के साथ बैठें और कृषि कानून से जुड़ी समस्याओं का समाधान निकालें। अगर किसान इन कानूनों में कुछ जोड़ चाहते हैं तो यह संभव है लेकिन बिल पूरी तरह से वापस नहीं होगा। साथ बैठने से हल निकल सकता है।
दोपहर 1.00 बजे कृषि भवन में कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर कुछ किसानों से मुलाकात करेंगे।
गृहमंत्री अमित शाह के घर किसान आंदोलन को लेकर एक अहम बैठक शुरू हो गई है। इसमें कृषि मंत्री तोमर, पियूष गोयल समेत गृह सचिव अजय कुमार भल्ला भी मौजूद हैं। कैबिनेट सेक्रेटरी राजीव गाबा भी बैठक में शामिल हैं।
किसानों आंदोलन बढ़ता देख सरकार ने कुछ देर बाद कृषि मामलों की जीओएम की बैठक बुलाई है। इस बैठक में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर भी शामिल होंगे। बैठक के लिए केंद्रीय कृषि तोमर अमित शाह के घर पहुंच चुके हैं।
भारतीय किसान यूनियन एकता (उग्रहान) के महासचिव सुखदेव सिंह ने पंजाब के 32 किसान यूनियन के एक दिन के अनशन के फैसले से खुद को अलग करते हुए कहा कि वह भूख हड़ताल नहीं करेंगे। सुखदेव ने पिछले सप्ताह एक कार्यक्रम आयोजित कर गिरफ्तार किए गए कार्यकर्ताओं को रिहा करने की मांग की थी। सुखदेव ने कहा, हम एक दिन का अनशन नहीं करेंगे।
टिकरी बॉर्डर पर भी किसान अनशन पर बैठे हैं। ऑल इंडिया किसान सभा के कार्यकारी अध्यक्ष बाल करण सिंह ब्रार ने इस मौके पर कहा कि सरकार हमारी मांगों को लेकर जिद पर अड़ी है। यह उन्हें जगाने का एक प्रयास है।
किसान आंदोलन के समर्थन में दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, दिल्ली सरकार में मंत्री सत्येंद्र जैन, गोपाल राय और आम आदमी पार्टी के अन्य नेता भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं।
भाकियू(भानु) के आंदोलन से पीछे हटने के बाद किसान आंदोलन में फूट पड़ने की बात कही जा रही है। यह सवाल जब भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत से पूछी गई तो उन्होंने कहा कि किसानों में कोई फूट नहीं है। भाकियू(भानु) के तीन नेताओं ने यूनियन से इस्तीफा दे दिया क्योंकि वह अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह के समझौता करने वाली बात से आहत थे।
केजरीवाल ने किसानों के समर्थन में अपना एक दिन का उपवास शुरू कर दिया है। इस मौके पर उन्होंने ट्वीट कर लोगों से जहां हैं वहीं उपवास करने की अपील की है। उन्होंने ट्वीट किया, 'उपवास पवित्र होता है। आप जहां हैं, वहीं हमारे किसान भाइयों के लिए उपवास कीजिए। प्रभु से उनके संघर्ष की सफलता की प्रार्थना कीजिए। अंत में किसानों की अवश्य जीत होगी।'
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने जानकारी दी है कि आज भी सिंघु, औचंदी, पियाऊ मनियारी, सभोली और मंगेश बॉर्डर पूरी तरह बंद रहेंगे। लोगों को लामपुर, साफियाबाद और सिंघु टोल टैक्स बॉर्डर से जाने की सलाह दी गई है। मुकरबा और जीटी करनाल रोड से ट्रैफिक डायवर्ट किया गया है। रिंग रोड, जीटी करनाल रोड और एनएच-44 की ओर से न जाने की सलाह दी गई है।
गाजीपुर बॉर्डर पर किसान आंदोलन के चलते आज गाजियाबाद से दिल्ली जाने वाला रास्ता बंद रहेगा। लोगों को दिल्ली जाने के लिए आनंद विहार, डीएनडी, चिल्ला, अप्सरा और भोपरा बॉर्डर का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।
अरविंद केजरीवाल ने किसानों के समर्थन में आज एक दिन का उपवास रखा है जिस पर पंजाब के सीएम ने कहा था कि ये उनका नाटक है। इस पर आज सीएम केजरीवाल ने ट्वीट कर उन्हें जवाब दिया कि, 'कैप्टन जी, मैं शुरू से किसानों के साथ खड़ा हूं। दिल्ली के स्टेडियम में जेल नहीं बनने दी, केंद्र से लड़ा। मैं किसानों का सेवादार बनके उनकी सेवा कर रहा हूं आपने तो अपने बेटे के ईडी केस माफ करवाने के लिए केंद्र से सेटिंग कर ली, किसानों का आंदोलन बेच दिया? क्यों?'
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी आज एक दिन की भूख हड़ताल पर हैं। इसे लेकर विरोधी उन पर हमला बोल रहे हैं। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने उन पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया कि, 'केजरीवाल जी, ये आपका पाखण्ड है। आपने पंजाब विधानसभा चुनावों में वादा किया था कि जीतने पर एपीएमसी कानून में संशोधन किया जाएगा। नवंबर 2020 में आपने दिल्ली में कृषि कानूनों को अधिसूचित भी किया और आज आप उपवास का ढोंग कर रहे हो। यह कुछ और नहीं बल्कि पाखण्ड ही है।
गाजीपुर बॉर्डर पर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत समेत अन्य किसान नेताओं ने शुरू की भूख हड़ताल। यहां ये लोग सुबह 8.00 बजे से शाम 5.00 बजे तक अनशन पर रहेंगे।
दिल्ली-गाजियाबाद के गाजीपुर बॉर्डर पर आज किसानों के आंदोलन का 17वां दिन है। लखीमपुर खीरी से आए एक किसान ने बताया कि जब हम अपना गन्ना लेकर मिल जाते हैं तो कई बार 24 घंटे तक बिना अन्न के रहना पड़ता है। हम इस उपवास के लिए तैयार हैं।
भारतीय किसान यूनियन(पंजाब) के जनरल सेक्रेटरी हरिंदर सिंह लखोवाल ने कहा है कि, हम सरकार को नींद से जगाना चाहते हैं। आज हमारे संयुक्त मोर्चा के 40 किसान नेता दिल्ली की सभी सीमाओं पर सुबह 8.00 बजे से शाम 5.00 बजे तक भूख हड़ताल पर रहेंगे। इनमें से 25 सिंघु बॉर्डर पर, 10 टिकरी बॉर्डर पर और पांच यूपी बॉर्डर बैठेंगे।
सुबह 8 बजे से अनशन पर बैठे हैं किसान
आज सुबह आठ बजे से दिल्ली की तमाम सीमाओं पर धरना दे रहे किसान भूख हड़ताल पर चले गए हैं। इनकी यह हड़ताल शाम पांच बजे तक रहेगी।