गाजीपुर बॉर्डर पर आंदोलनरत किसान
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चीनी निर्यात पर 3500 करोड़ की सब्सिडी देकर किसानों को फायदा पहुंचाने वाले सरकार के दावे को किसानों ने नकार दिया। गाजीपुर बॉर्डर पर बैठे किसान नेताओं ने कहा कि गन्ना मिलों पर पिछले साल का करीब 15 हजार करोड़ रुपये बकाया है। ऐसे में सरकार को किसानों के बकाया पेमेंट की बात करनी चाहिए।
आंदोलन के समय ऐसे पैकेज का एलान कर किसानों को भ्रमित करना चाहती है। सरकार के पैकेज से कब और कितने किसानों को लाभ पहुंचेगा इसका भी पता नहीं। सरकार ऐसी भ्रामक बातें न कर कृषि कानूनों को वापस ले। आज किसान मरने-मारने को तैयार है। किसान आंदोलन अब जन आंदोलन बन चुका है।
जिला गाजियाबाद, भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष बिजेंद्र सिंह ने बताया कि उत्तर-प्रदेश में ही गन्ना मिलों पर कई-कई सौ करोड़ का बकाया है। ज्यादातर गन्ना मिलों ने एक साल से किसानों को उनकी फसल का भुगतान नहीं किया है।
सरकार इन मिलों से जल्द भुगतान करवाने की बात करें तो कुछ होगा। सिकंराराव, हाथरस से आए भारतीय किसान यूनियन के नेता फौजी केरन सिंह ने बताया कि सरकार यदि वाकई किसानों का भला सोचती है तो गन्ने का रेट बढ़ाया जाए।
सरकार कम कीमत पर बीज, खेती के उपकरण व अन्य सामान उपलब्ध करवाए। सरकार कानून वापस लेकर किसानों को फायदा पहुंचा सकती है। लेकिन सरकार ऐसा नहीं करेगी। सरकार के उद्योगपति दोस्तों ने कई-कई साल पहले अनाज भंडारण के लिए गोदाम बना लिए थे।
अब सरकार ने उनके कहने पर ही कानून बनाया है। केंद्र सरकार ने बुधवार को गन्ना किसानों को फायदा पहुंचाने के लिए चीनी निर्यात पर 3500 करोड़ की सब्सिडी देने का एलान किया था। सरकार ने यह भी कहा था कि इस वर्ष 60 लाख टन चीनी निर्यात की जाएगी।