नहर पार ग्रेटर फरीदाबाद के किसानों ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश का स्वागत किया है जिसमें मास्टर प्लान 2031 पर अगले आदेश तक रोक लगाई गई है।
कोर्ट के इस फैसले को किसानों ने अपनी जीत बताया है। उन्होंने क्षेत्र में किसी प्रकार का बिल्डर लाइसेंस न देने की मांग की है।
बृहस्पतिवार को सदपुरा गांव में किसानों की एक बैठक का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता नहर पार ग्रेटर फरीदाबाद किसान संघर्ष समिति के कार्यकारी अध्यक्ष शिवदत्त वशिष्ठ व किसान नेता टिपरचंद ने की। इसमें मास्टर प्लान का खुलकर विरोध किया गया।
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साथ ही बैठक में कहा गया कि दयालपुर से लेकर तिलपत तक रिहायशी जोन की प्लानिंग की गई है। जबकि गांव सदपुरा की जमीन को यूटीलिटी के लिए रखा गया है। जोकि इस गांव के किसानों के खिलाफ है।
किसानों ने आरोप लगाया कि सरकार ने इस बाबत अधिसूचना सार्वजनिक नहीं की और न ही इस बारे में लोगो से आपत्ति मांगी गई। किसानों को यह भी नहीं बताया गया कि वह अपनी आपत्ति किस अधिकारी के समक्ष दर्ज कराएं।
नया भूमि अधिग्रहण कानून बन जाने के बावजूद सरकार आनन-फानन में आज भी किसानों की जमीन को हथियाने में लगी है। नया शहर बसाने के नाम पर प्रदेश सरकार जमीन को नए-नए तरीके से मास्टर प्लान के जरिए हड़पना चाहती है।