मुआवजे की मांग को लेकर 183 दिन से धरने पर बैठे किसान बुधवार को उग्र हो गए। कॉलेज के युवाओं और कई संगठनों के साथ करीब डेढ़ हजार किसान हापुड़ रोड पर पैदल मार्च करते हुए कलक्ट्रेट की ओर चल पडे़।
करीब पौना घंटे तक हापुड़ रोड पर ट्रैफिक जाम रहा। कलक्ट्रेट पर किसानों ने जमकर नारेबाजी की और दो घंटे तक धरना दिया। एसडीएम सदर शैलेंद्र सिंह और सीओ ने किसानों के बीच पहुंचकर शुक्रवार को डीएम के साथ बैठक कराने का आश्वासन दिया।
किसानों ने चेतावनी दी है कि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वह पानी की टंकी पर चढ़कर प्रदर्शन और भूख हड़ताल करेंगे। भाकियू जिलाध्यक्ष विजेंद्र सिंह ने कहा कि अब किसान आर पार की लड़ाई लड़ेंगे।
मेरठ मंडल अध्यक्ष राजवीर सिंह ने कहा कि प्रदेश और केंद्र सरकार किसानों को बस आश्वासन देती हैं। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को डीएम के साथ बैठक कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मुद्दे पर बात करने का प्रस्ताव रखा जाएगा।
सतवीर चौधरी, पार्षद हरीश चौधरी, सुधीर चौधरी, डॉ. प्रदीप चौधरी, डॉ. अजय चौधरी, संदीप चौधरी, विशाल सिंह, किशनू, वीरेंद्र रहे।
इन्होंने किया समर्थनः
हिंदू रक्षा दल, गौरक्षा हिंदू दल, अखंड भारत योद्धा दल, संयुक्त व्यापार मंडल के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने किसानों की लड़ाई में साथ देने का आश्वासन दिया। वहीं, एबीईएस, आईएमएस, आईटीएस, एमएमएच समेत अन्य कॉलेज के छात्र भी बड़ी संख्या में पहुंचे।
ये है मामला
सीपीडब्ल्यूडी ने 1964 में किसानों की जमीन अधिग्रहित की थी। उस समय दो रुपये प्रति गज की दर से मुआवजा मिला था, जिसका किसानों ने विरोध किया था। किसानों की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने 84 रुपये प्रति गज मुआवजा तय किया था।
सीपीडब्ल्यूडी ने मुआवजा न देकर किसी एक मुद्दे को लेकर हाईकोर्ट में अपील की। अब पांच नवंबर को हाईकोर्ट फैसला सुनाएगा। मांग है कि सुप्रीम कोर्ट से तय किया हुआ मुआवजा मिले या किसानों की जमीन वापस की जाए।