भूमि अधिग्रहण बिल के विरोध में 10 अप्रैल को भारतीय किसान यूनियन (अ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ऋषिपाल अंबावता के नेतृत्व में जंतर-मंतर दिल्ली में एक महापंचायत आयोजित की जाएगी। इसमें किसानों के हितों की रक्षा के लिए रूपरेखा तैयार की जाएगी।
मंगलवार को प्रेस को जारी बयान में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसानों को बहकाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्हाेंने कहा कि भूमि अधिग्रहण बिल पास होने से सबसे ज्यादा नुकसान देश के उन किसानों को होगा, जिनके अन्न से देश चलता है।
भूमि अधिग्रहण बिल के पास होने से जहां किसान बेकार हो जाएंगे, वहीं इनकी रोजी-रोटी का साधन भी छिन जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मन की बात में यह कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि किसानों को रोजगार मुहैया कराया जाएगा, लेकिन आज तक देश का किसान ही सबसे ज्यादा बेरोजगारी की मार झेल रहा है।
क्योंकि किसान के पास खेतीबाड़ी के अलावा कुछ काम नहीं होता। उन्हाेंने आरक्षण पर कहा कि जाति के आधार पर आरक्षण समाप्त कर आर्थिक स्थिति के आधार पर आरक्षण लागू किया जाए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने किसानों की बात नहीं मानी तो 10 अप्रैल को एक पंचायत कर आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी। इस पंचायत में 10 से 15 प्रांतों के किसान नेता भाग लेंगे।