गाजीपुर सीमा पर तैनात सुरक्षाबल
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कृषि कानूनों को लेकर 14 दिन से गाजीपुर बार्डर पर धरने पर बैठे किसान बुधवार को खासे नाराज रहे। उन्होंने सरकार की ओर से आए प्रस्ताव को ठुकराते हुए कहा कि यदि तीनों कानूनों को वापस नहीं लिया तो वह अपनी जमीन पर खेती करना छोड़ देंगे। उसे बंजर छोड़ दिया जाएगा। चेतावनी दी कि वह न तो बैंकों के लोन की किस्त जमा करेंगे और न ही बिजली के बिलों का भुगतान करेंगे।
अमरोहा के धनौरा मंडी से आए 70 वर्षीय किसान जसवंत ने बताया कि 1947 में बंटवारे के बाद उन्हें पंजाब में लाकर बसाया गया था, लेकिन 1960 में वह पंजाब से यूपी के अमरोहा में शिफ्ट हो गए। पहले ही किसान परेशान था। अब सरकार के नए कानूनों से उसकी कमर टूट जाएगी। हिदायत दी कि अब वह उतनी ही खेती करेंगे कि जिससे उनके परिवार का गुजारा हो जाए और बाकी को बंजर छोड़ देंगे। अमरोहा से ही आए झोंडा सिंह (75) ने केंद्र पर पूंजीपतियों से मिले होने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि वह अपना घर छोड़कर बार्डर पर पड़े हुए हैं। शायद सरकार उनकी नहीं सुनने वाली है। हापुड़ के अजराड़ा से आए किसान सुलेमान ने बताया कि बीज, कीटनाशक, खेती के उपकरण इतने महंगे हैं कि पहले ही औसत नहीं आ रहा है। नए कानूनों से तो वे बर्बाद ही हो जाएंगे। केंद्र सरकार चाहे कोई भी रही हो सभी ने अपने-अपने हित साधकर किसानों को धोखा दिया है। अब बिना कानून वापस कराए वह दिल्ली से नहीं जाने वाले हैं।