जेवर तहसील के रबूपुरा कस्बे में बारिश से अपनी करीब नौ बीघा फसल को बर्बाद हुआ देख सदमे से एक किसान की मौत हो गई। किसान की सदमे से मौत की सूचना पर पहुंचे अधिकारियों ने भी किसान की फसल में बारिश के कारण 65 प्रतिशत तक के नुकसान का आकलन किया है।
मूलत: रबुपूरा कस्बे के सदभावना नगर निवासी 50 वर्षीय किसान ओमप्रकाश के परिवार में दो बेटे सौरव व विशाल और पत्नी सावित्री समेत चार लोग हैं। कस्बे के पास ही किसान ओमप्रकाश पर खसरा संख्या 1369 में 0.7485 हेक्टेअर जमीन है।
वे खेती के साथ-साथ गाजियाबाद एक कंपनी में छोटी मोटी नौकरी कर अपने परिवार का पालन पोषण करते थे। परिजनों ने बताया कि शुक्रवार सुबह नौकरी पर जाने से पहले ओमप्रकाश अपने बेटे सौरव के साथ बाइक से अपनी फसल देखने खेत पर गया था।
बारिश से बर्बाद फसल देख वह सदमे में आकर आकर वही बैठ गया। पिता की तबियत बिगड़ते देख सौरव उन्हें जैसे तैसे घर लेकर आया।
फसल की आय से चलता था घर
आनन-फानन में परिजनों ने किसान को गाजियाबाद के एक अस्पताल में भर्ती कराया। यहां से डॉक्टरों ने उसे नोएडा के कैलाश अस्पताल रेफर कर दिया। शुक्रवार को ही देर रात इलाज के दौरान ओमप्रकाश ने दम तोड़ दिया।
पिता के साथ मजदूरी करने वाले किसान ओमप्रकाश के बड़े बेटे सौरव ने बताया कि उनके पास 9 बीघा जमीन है। सालभर में गेंहू की फसल से होने वाली आय से ही घर का खर्च चलता था, लेकिन इस बार बारिश से फसल तबाह हो जाने से परिवार बर्बादी के कगार पर पहुंच गया है।
परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। फसल चौपट होने और घर चलाने के दर्द के सदमे को उसके पिता सहन नही कर सके, जिससे उनकी मौत हो गई।
कई दिनों से परेशान था ओमप्रकाश
परिजन योगेश ने बताया कि किसान ओमप्रकाश की फसल के नुकसान को लेकर कई दिनों से परेशान था। भविष्य की चिंता में अंदर ही अंदर घुट रहा था और इसे लेकर परिवार में किसी से भी बात नहीं करता था। शुक्रवार को फसल का नुकसान देख सदमे में आकर ही उसकी मौत हो गई है।
तहसीलदार जेवर सुशील कुमार का कहना है कि किसान ओमप्रकाश की मौत की सूचना मिलने पर लेखपाल द्वारा उसकी प्रभावित फसल का आकलन किया था। बारिश से उसकी 9 बीघा फसल में करीब 65 प्रतिशत का नुकसान हुआ है, जिसकी रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी जा रही है।
दूसरी ओर, जेवर तहसील के फलैंदा गांव निवासी 51 वर्षीय किसान बुद्धा की भी 8 बीघा फसल बर्बाद होने से मौत हो गई है। क्षेत्रीय लेखपाल रणवीर शर्मा ने गांव में जाकर किसान की बर्बाद फसल का सर्वे किया है। वह कई दिनों से बीमार भी बताया जा रहा था।