लोकायुक्त के आदेश पर फार्म हाउस आवंटन योजना के आवेदनों की स्क्रूटनी
करने के लिए प्राधिकरण ने समिति गठित कर दी है। दो से तीन माह में जांच
प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
प्राधिकरण ने वर्ष 2008 व 2010 में यमुना
किनारे फार्म हाउस योजना निकाली थी। योजना में एक हजार वर्ग मीटर से लेकर
एक लाख वर्ग मीटर तक के भूखंड शामिल किए गए थे।
ये फार्म हाउस
मंगरौली-छपरौली, गुलावली, झट्टा आदि गांवों की जमीन पर यमुना किनारे बने
बांध से एक्सप्रेसवे की तरफ स्थित हैं। साक्षात्कार के आधार पर कुल 152
फार्म हाउसों का आवंटन किया गया।
उस समय करीब 3300 रुपये प्रति वर्ग मीटर
की कीमत पर आवंटित हुए। बहुत से आवेदकों को फॉर्म हाउस नहीं मिल सके। इसके
बाद आवंटन प्रक्रिया में धांधली के साथ ही तत्कालीन कई अफसर और नेताओं को
गलत तरीके से फार्म हाउस आवंटित करने के आरोप लगे।
किसान नेता योजना के विरोध में
कुछ किसान नेता भी इसके विरोध में आ गए। उनका कहना था कि अगर उनकी जमीन खेती के लिए आवंटित करनी ही थी तो उनसे क्यों ली गई।
किसान खुद ही उस पर खेती कर सकते थे। इसके बाद प्रदेश के लोकायुक्त जस्टिस केएन मेहरोत्रा के यहां यह मामला दर्ज हुआ। लोकायुक्त ने लंबे समय तक जांच-पड़ताल की।
प्राधिकरण और शासन के कई आला अफसरों से पूछताछ हुई। कुछ माह पूर्व लोकायुक्त ने इसके आवंटन में गड़बड़ी न होने का फैसला सुनाया।
जांच पूरी होते ही कर दी जाएगी सबलीज
लोकायुक्त ने यह भी कहा कि
प्राधिकरण खुद आवेदनों की फिर से जांच कर ले। आदेश का पालन करते हुए
प्राधिकरण ने एक समिति बना दी है।
इस समिति में ओएसडी मनोज राय व जीएम
विपिन गौड़ भी शामिल हैं। यह समिति अब सभी आवेदनों की जांच करेगी।
अगले दो
से तीन माह में यह समिति जांच प्रक्रिया पूरी कर लेगी। अगर कोई अड़चन नहीं
आई तो इस समिति की जांच पूरी होते ही आवेदकों के नाम फार्म हाउसों की सबलीज
कर दी जाएगी।
अब सर्किल रेट पर देना होगा स्टांप
नोएडा में किसी भी प्रॉपर्टी के आवंटन के छह माह के भीतर रजिस्ट्री होने पर प्राधिकरण से तय आवंटन रेट पर स्टांप शुल्क देना होता है।
जिन फार्म हाउसों की रजिस्ट्री छह माह के भीतर (करीब 24) हुई है उनके आवंटियों ने उस समय के आवंटन रेट करीब 3300 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से स्टांप शुल्क दिया था।
छह माह की अवधि खत्म हो चुकी है, ऐसे में अब इन आवंटियों को मौजूदा सर्किल रेट के हिसाब से रजिस्ट्री करानी होगी।
इस समय करीब दस हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर सर्किल रेट है। रजिस्ट्री विभाग से जानकारी के मुताबिक कुल 152 फार्म हाउसों में से 24 फार्म हाउसों की रजिस्ट्री उसी समय हो गई थी।
शेष 128 फार्म हाउसों की रजिस्ट्री बाकी है। इनसे स्टांप विभाग को करीब 64 करोड़ रुपये का स्टांप शुल्क मिलने का अनुमान है।