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Faridabad News: अपहरण और जबरन शादी के मामले में युवक सभी आरोपों से बरी

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अदालत ने कहा, अभियोजन पक्ष युवक के खिलाफ आरोप साबित करने में असफल रहा
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। सेक्टर आठ थाना क्षेत्र में दर्ज अपहरण और जबरन शादी के मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अजय शर्मा की अदालत ने युवक को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष युवक के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 11 गवाह पेश किए, जिनमें शिकायतकर्ता, उसकी बेटी जिससे जबरन शादी करने का आरोप था, उसकी माता व पुलिस अधिकारी शामिल थे। अदालत ने अपने निर्णय में पाया कि मामले के प्रमुख गवाहों ने अदालत में अभियोजन के आरोपों का समर्थन नहीं किया।

अदालत ने यह भी पाया कि युवती के बयानों में विरोधाभास हैं और उसने मेडिकल जांच कराने से भी इनकार किया था। इन परिस्थितियों में अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य आरोपी के विरुद्ध आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं पाए गए। सभी तथ्यों के आधार पर अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में विफल रहा है। परिणामस्वरूप युवक को आईपीसी की धारा 363 और 366 के तहत लगाए गए सभी आरोपों से बरी कर दिया गया व उसके जमानती बांड समाप्त कर दिए गए।
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युवती ने अपने बयान में कहा कि वह घर से किसी काम से गई थी और कुछ समय बाद वापस आ गई थी व उसके साथ कोई गलत घटना नहीं हुई। उसने आरोपी की पहचान भी नहीं की और अपने पूर्व में दिए गए बयानों को दबाव में दिया गया बताया। इसी प्रकार शिकायतकर्ता पिता ने कहा कि उन्होंने कोई शिकायत नहीं दी थी और उनकी बेटी कभी लापता नहीं हुई थी। उन्होंने यह भी कहा कि उनके हस्ताक्षर खाली कागजों पर लिए गए थे। पीड़िता की मां ने भी अदालत में इसी प्रकार का बयान दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अपहरण के अपराध को सिद्ध करने के लिए यह आवश्यक है कि आरोपी द्वारा नाबालिग को बहलाकर, फुसलाकर या जबरन ले जाने का स्पष्ट प्रमाण हो। इस मामले में ऐसा कोई साक्ष्य रिकॉर्ड पर नहीं आया, जिससे यह सिद्ध हो सके कि आरोपी ने पीड़िता को इस प्रकार अपने साथ ले गया।
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मामले के अनुसार दो अगस्त 2023 को शिकायतकर्ता ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि उसकी बेटी 31 जुलाई 2023 को बाजार गई थी और वापस नहीं लौटी। इस आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच के दौरान युवती को युवक के घर से वापिस परिजनों को सौंपा गया और उसके बयान दर्ज किए गए। बाद में मामले में आईपीसी की धारा 363 और 366 के तहत कार्रवाई की गई।
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