नाले पर अत्याधुनिक ट्रैश रैक प्रणाली लगाने की योजना को मंजूरी, 1.32 करोड़ होंगे खर्च
मानसून से पहले काम को पूरा करने का लक्ष्य
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। औद्योगिक नगरी में बढ़ते जल संकट, नहरों में गिरते कचरे और प्रदूषण की समस्या को देखते हुए सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने महत्वपूर्ण तकनीकी हस्तक्षेप का निर्णय लिया है। आगरा और गुड़गांव नहर फीडर से जुड़े बुढ़िया नाले पर अत्याधुनिक ट्रैश रैक प्रणाली लगाने की योजना को मंजूरी दे दी गई है। करीब 1 करोड़ 32 लाख 95 हजार रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना का उद्देश्य नहरों में आने वाले प्लास्टिक, सिल्ट और ठोस कचरे को रोककर पानी की गुणवत्ता सुधारना और सिंचाई व्यवस्था को अधिक भरोसेमंद बनाना है। विभाग ने इस काम को मानसून से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा है ताकि बरसात के दौरान नहरों में आने वाले अतिरिक्त कचरे को शुरुआत में ही रोका जा सके।
फरीदाबाद में आगरा और गुड़गांव नहर फीडर से शहर की जलापूर्ति और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की सिंचाई व्यवस्था जुड़ी हुई है। लेकिन पिछले कई वर्षों से बुढ़िया नाले के जरिये बड़ी मात्रा में प्लास्टिक, झाड़-झंखाड़, गाद और अन्य ठोस कचरा नहरों में गिरता रहा है। इस कचरे के कारण कई बार साइफन और पंपिंग स्टेशन जाम हो जाते हैं जिससे पानी की आपूर्ति प्रभावित होती है। जल शोधन संयंत्रों को भी अतिरिक्त सफाई करनी पड़ती है, जिससे खर्च बढ़ता है और कई बार सप्लाई में रुकावट आती है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार मौजूदा व्यवस्था में कचरा हटाने के लिए मैन्युअल सफाई करनी पड़ती है, जिसमें समय और श्रम दोनों अधिक लगते हैं। इसी समस्या के स्थायी समाधान के लिए अब आधुनिक ट्रैश रैक लगाने का फैसला लिया गया है।
ट्रैश रैक कैसे करेगा काम
ट्रैश रैक एक मजबूत लोहे की जालीनुमा संरचना होती है, जिसे नहर या जल निकासी के मुहाने पर लगाया जाता है। यह पानी को गुजरने देता है लेकिन प्लास्टिक, लकड़ी, घास और अन्य ठोस कचरे को आगे जाने से रोक देता है।
बुढ़िया नाले के साइफन पर लगने वाली यह प्रणाली आधुनिक सेल्फ-क्लीनिंग तकनीक से लैस होगी जिससे जाल में फंसा कचरा स्वतः बाहर निकाल दिया जाएगा। इससे मशीनों पर दबाव कम होगा और पानी का प्रवाह बाधित नहीं होगा। तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की व्यवस्था बड़े शहरों में जल शोधन संयंत्रों की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल की जाती है और अब इसे फरीदाबाद में लागू किया जा रहा है।
75 दिन में पूरा करने का लक्ष्य
सिंचाई विभाग के अनुसार इस परियोजना की अनुमानित लागत 1.32 करोड़ रुपये रखी गई है। काम को पूरा करने के लिए 75 दिन का समय तय किया गया है जिससे उम्मीद है कि मानसून से पहले यह प्रणाली चालू हो जाएगी।
लोगों को होगा सीधा फायदा
इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ उन हजारों लोगों को मिलेगा जो नहर के पानी पर निर्भर हैं। शहर के जल शोधन संयंत्रों में कचरा कम पहुंचेगा, जिससे पानी की सप्लाई अधिक नियमित हो सकेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई के लिए साफ पानी मिलेगा, जिससे फसलों पर असर कम होगा। नहरों में पानी का प्रवाह सुचारू रहेगा जिससे बरसात के समय ओवरफ्लो और जलभराव की समस्या भी कम हो सकती है।
बुढ़िया नाला बना हुआ है बड़ी चुनौती
वर्तमान में बुढ़िया नाले से बड़ी मात्रा में कचरा नहर में पहुंचता है। कई बार कर्मचारियों को मशीनों की मदद से सफाई करनी पड़ती है लेकिन तेज बहाव के कारण कचरा फिर जमा हो जाता है। इस वजह से जल शोधन संयंत्रों को भी अतिरिक्त फिल्टरिंग करनी पड़ती है और सप्लाई में देरी होती है।
लोगों की सुविधा के लिए प्राधिकरण तेजी से काम कर रहा है। जल्द इस परियोजना का काम भी शुरू कर दिया जाएगा। -गौरव लांबा कार्यकारी अभियंता