पुराने रीति रिवाजों को तोड़कर आगे बढ़ रहीं महिलाएं, अपने दम पर बना रही हैं पहचान
महिला दिवस पर विशेष
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। आधुनिक युग की महिलाएं पुराने रीति रिवाजों और मिथक को तोड़कर न सिर्फ आगे बढ़ रही हैं बल्कि अपने दम पर सफलता के फलक को छू कर लोगों के लिए मिसाल कायम कर रही हैं। कोराेना काल के बाद उद्योग में काफी उतार चढ़ाव देखने को मिला। राह में कई मुश्किलें भी आईं, लेकिन उन सब को दरकिनार करते हुए अपने जज्बे, जुनून और जिद के चलते अपने कदम आगे बढ़ाती गईं। जो आज देश विदेश में अपनी पहचान बना रही है। ऐसी ही महिलाओं में शामिल हैं जिले की सिवली चौधरी, निभा लाल और मेघना श्रीवास्तव। जिन्होंने अपने दम पर अपनी पहचान बनाई है। सिवली चौधरी तो मात्र तीन वर्ष की कड़ी मेहनत के बाद 50 करोड़ रुपये की मालकिन बन गई।
इग्लैंड में एमबीए कर शुरू किया अपना व्यवसाय
इग्लैंड से एमबीए करने के बाद सिवली चौधरी मुजेड़ी में एक प्री-इंजीनियरिंग बिल्डिंग, वेयर हाउस, कंटेनर, पोर्टेबल हाउस बनाने की कंपनी शुरू की। मात्र तीन वर्ष की कड़ी मेहनत के बाद 50 करोड़ रुपये की मालकिन बन गई। उन्होंने पढ़ाई खत्म करने के बाद एक निजी कंपनी में 60 लाख रुपये के वार्षिक पैकेज से नौकरी की शुरूआत की थी। नौकरी छोड़कर उन्होंने अपना काम शुरू किया। उसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज एनएनटी, टाटा सहित कई नामचीन कंपनियां उनके ग्राहक हैं। कोरोना काल के दौरान उन्होंने एमबीए की पढ़ाई पूरी की थी। इससे पहले उन्होंने एक नामचीन महाविद्यालय से इंजीनियरिंग की थी।
घरेलू महिला से बनीं उद्योगपति
मुश्किलें हर किसी के जीवन में आती हैं लेकिन यह घड़ी दो घड़ी के लिए होती हैं। इनसे घबराना नहीं चाहिए और डटकर इसका सामना करना चाहिए। इन चुनौतियों और संघर्षों को यदि पालने का हुनर जान गए तो फिर सफलता दूर नहीं। कुछ ऐसा ही मानती हैं सेक्टर 21 बी निवासी महिला उद्यमी निभा लाल का। उनका कहना है कि कोरोना काल के बाद व्यापार को संभालना मुश्किल हो गया था। लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत के बल पर एक बार फिर व्यापार (थर्मल इन्सुलेशन सामग्री) को मजबूत स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया। कहती हैं कि शुरू में चुनौतियों ने बहुत रास्ता रोका लेकिन मंजिल पर नजर थी इसलिए सफलता मिलती गई।
कोरोना काल ने खूब सताया
कोरोना के दौरान चुनौतियों का सामना करने से लेकर एक सफल उद्यमी बनने तक की मेघना श्रीवास्तव की यात्रा, लचीलेपन और कड़ी मेहनत की शक्ति का उदाहरण है। दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत किसी भी चुनौती से निपटने में मदद कर सकती है। उनका कहना है कि कोरोना महामारी आई, तो उनकी मशीन बनाने वाली पारंपरिक कंपनी डगमगाने लगी थी। इस दौरान उनके सामने कई चुनौतियां आईं, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। इसके बजाय, उन्होंने उपलब्ध संसाधनों से ही अपने पारंपरिक उद्योग को आगे बढ़ाने के लिए प्रयास किया।