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Faridabad News: फरीदाबाद के ट्यूबवेलों के पानी की होगी जांच

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रिपोर्ट बताएगी कौन-सी फसल देगी ज्यादा लाभ
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मोहित शुक्ला
फरीदाबाद। जिले के किसानों को अब अपने ट्यूबवेल के पानी की गुणवत्ता के आधार पर खेती करने की वैज्ञानिक सलाह मिलेगी। फरीदाबाद में ट्यूबवेलों के पानी की मुफ्त जांच की तैयारी शुरू की जा रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर किसानों को यह बताया जाएगा कि उनके खेत के पानी के अनुसार कौन-सी फसल अधिक उपयुक्त रहेगी किन फसलों से बचना चाहिए और भूमि की उर्वरता बनाए रखने के लिए क्या सुधारात्मक उपाय अपनाने होंगे।

फरीदाबाद औद्योगिक जिला होने के साथ-साथ तेजी से बढ़ते शहरीकरण का भी दबाव झेल रहा है। ऐसे में जिले के कई ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल की गुणवत्ता लगातार प्रभावित हो रही है। विभिन्न वैज्ञानिक सर्वे और भूजल संबंधी रिपोर्टों में कई स्थानों पर पानी में टीडीएस, खारापन, हार्डनेस, सोडियम और क्लोराइड की मात्रा सामान्य से अधिक दर्ज की गई है। वहीं यमुना खादर से जुड़े कुछ क्षेत्रों में आर्सेनिक, मैंगनीज और आयरन जैसे तत्व भी निर्धारित मानकों से अधिक पाए जाने की बात सामने आई है।
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ऐसी स्थिति में एक ही तरह की खेती सभी किसानों के लिए लाभकारी नहीं रहती और कई बार गलत फसल चयन से उत्पादन घटने के साथ-साथ जमीन भी धीरे-धीरे लवणीय और सेमग्रस्त होने लगती है।

जांच रिपोर्ट के आधार पर मिलेगी फसल चुनने की सलाह

ट्यूबवेल के पानी की जांच के बाद कृषि विशेषज्ञ किसानों को उनकी जल गुणवत्ता के अनुसार फसल चयन की सलाह देंगे। जिन क्षेत्रों में पानी अधिक खारा या टीडीएस अधिक होगा वहां गेहूं, जौ, सरसों, बाजरा, ज्वार और ग्वार जैसी फसलों को प्राथमिकता देने की सलाह दी जा सकती है। वहीं धान और गन्ने जैसी अधिक पानी की मांग करने वाली फसलों से बचने की सलाह मिलेगी ताकि भूमि की गुणवत्ता खराब न हो।

जिन क्षेत्रों के पानी में आर्सेनिक या अन्य भारी धातुओं की मात्रा अधिक होगी वहां भी वैज्ञानिकों की सिफारिश के अनुसार फसल चयन किया जाएगा। इससे किसानों को सुरक्षित और बेहतर उत्पादन लेने में मदद मिलेगी।

मिट्टी सुधार के उपाय भी बताए जाएंगे

पानी की जांच केवल फसल चयन तक सीमित नहीं रहेगी। रिपोर्ट में यह भी बताया जाएगा कि मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के लिए जिप्सम या अन्य सुधारकों की आवश्यकता है या नहीं। इससे लंबे समय तक खेती योग्य भूमि को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी और उत्पादन लागत भी कम हो सकेगी।

डिजिटल रिकॉर्ड रहेगा उपलब्ध
जांच के बाद पानी के प्रत्येक नमूने का रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित किया जाएगा। किसानों को उनकी जल गुणवत्ता, रासायनिक जांच रिपोर्ट और कृषि विशेषज्ञों की सलाह ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाएगी जिससे भविष्य में भी उसी आधार पर खेती की योजना बनाई जा सकेगी।

किसानों को होगा सीधा लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि पानी की गुणवत्ता के अनुसार खेती होने से फसल उत्पादन में सुधार आएगा अनावश्यक खर्च कम होगा, मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहेगी और लवणीय व सेमग्रस्त भूमि को दोबारा उत्पादक बनाने में मदद मिलेगी। फरीदाबाद जैसे जिले में जहां कई क्षेत्रों में भूजल की गुणवत्ता अलग-अलग है यह पहल किसानों के लिए वैज्ञानिक और टिकाऊ खेती की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
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खेती के पानी की जांच बहुत जरूरी है। वहीं खेती के लिए ट्यूबवेल से चलता हुआ पानी लेना चाहिए जमीन में रुका हुआ पानी नहीं लेना चाहिए। जगारूकता के साथ खेती करने पर भू-जल स्तर बचाने के साथ मिट्टी की क्षमता भी बढ़ाई जा सकती है। डॉ. अशोक कुमार देशवाल , वरिष्ठ समन्यवक चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय भूपानी केंद्र
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