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Faridabad News: करनेरा गांव में हुए हादसे के बाद ग्रामीणों में बिजली विभाग के प्रति नाराजगी

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अमर उजाला ब्यूरो
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फरीदाबाद। स्मार्ट सिटी फरीदाबाद में बिजली व्यवस्था की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मंगलवार सुबह करनेरा गांव में हुए हादसे के बाद ग्रामीणों में बिजली विभाग के प्रति भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि घरों के बेहद करीब से गुजर रही बिजली लाइनें लंबे समय से खतरा बनी हुई हैं और कई बार शिकायत के बावजूद उन्हें सुरक्षित बनाने की दिशा में प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

यह घटना ऐसे समय हुई है जब कुछ दिन पहले ही बिजली विभाग के दो संविदा कर्मचारियों की ड्यूटी के दौरान करंट लगने से मौत हो चुकी है। दोनों कर्मचारी बिजली लाइन पर मरम्मत कार्य कर रहे थे। घटना के बाद सुरक्षा मानकों, शटडाउन प्रक्रिया और कार्यस्थल पर सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता को लेकर भी गंभीर प्रश्न उठे थे। कर्मचारियों की मौत के बाद विभाग ने जांच की बात कही थी लेकिन सुरक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार दिखाई नहीं दिया।
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पहले भी हो चुके हैं हादसे
फरीदाबाद में खुले और जर्जर बिजली तारों से होने वाले हादसे लगातार सामने आते रहे हैं। पिछले साल अगस्त में उत्तराखंड की मूल निवासी दीपा की सेक्टर-21ए में बिजली का तार टूटने से चपेट में आने से मौत हो गई थी। साल 2024 में तिगांव में शिव कॉलेज के पास डाक कावड़ लाते समय डाक कावड़ बिजली की ढीली हाईटेंशन तार की चपेट में आ गई थी। जिससे 9 लोगों के घायल होने के साथ 1 युवक नितिन की मौत हो गई थी। वहीं साल 2024 में मुजेसर में लाइन ठीक करते समय दो लोगों की मौत हो गई थी। बारिश के मौसम में यह खतरा और बढ़ जाता है जब बिजली के खंभों और खुले तारों में करंट उतरने की शिकायतें भी सामने आती हैं।
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भूमिगत लाइन डालने की योजना कागजों से नहीं आ पा रही बाहर
शहर में करोड़ों रुपये की लागत से बिजली नेटवर्क को आधुनिक बनाने और कई क्षेत्रों में अंडरग्राउंड केबलिंग की योजनाओं की घोषणा की गई है। जिसका उद्देश्य घनी आबादी वाले इलाकों, संकरी गलियों और संवेदनशील क्षेत्रों में खुले बिजली तारों को हटाकर सुरक्षित व्यवस्था विकसित की जाए। हालांकि, जमीनी स्तर पर यह परियोजना जमीनी स्तर पर नहीं उतर पा रही है। अधिकारी केवल कागजों में ही फंसे हुए हैं। कई बार इसको लेकर बड़ी बड़ी घोषणा की जाती है लेकिन लोगों को इसका कोई लाभ अभी तक मिलना शुरू नहीं हो पाया है। कई स्थानों पर घरों के निर्माण के बाद भी बिजली लाइनें सुरक्षित दूरी पर स्थानांतरित नहीं की गई हैं।
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