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Faridabad News: पांच साल में 21 हजार से अधिक कुत्तों का टीकाकरण-नसबंदी

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शहरी क्षेत्र में चुनौती से निपटने के लिए ठोस और दीर्घकालिक व्यवस्था तैयार की जा रही है
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मोहित शुक्ला
फरीदाबाद। औद्योगिक नगरी फरीदाबाद में लावारिस कुत्तों की समस्या को लेकर नगर निगम ने अब तक जो कदम उठाए हैं धीरे धीरे उनके परिणाम दिखने शुरू हो गए हैं। जल्द ही लावारिस कुत्तों के लिए शेल्टर हाउस भी बना दिए जाएंगे। पिछले पांच साल में निगम की तरफ से 21 हजार से अधिक कुत्तों का टीकाकरण-नसबंदी की जा चुकी है।

बीते कुछ वर्षों में जहां डॉग बाइट और कुत्तों की बढ़ती संख्या को लेकर चिंता बन रही है वहीं निगम की हालिया रिपोर्ट यह संकेत देती है कि शहर में इस चुनौती से निपटने के लिए ठोस और दीर्घकालिक व्यवस्था तैयार की जा रही है। साल 2020 से 2025 के बीच निगम द्वारा 21483 लावारिस कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण किया जा चुका है जो अब पहचान आधारित प्रबंधन प्रणाली से जोड़ा जा रहा है।
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नगर निगम के अनुसार पिछले पांच वर्षों में लगातार चलाए गए एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) कार्यक्रम के तहत हजारों लावारिस कुत्तों को नसबंदी और एंटी-रेबीज टीका लगाया गया। साल 2021 इस अभियान का सबसे सक्रिय वर्ष रहा जब 4800 कुत्तों को कवर किया गया। इसके बाद भी हर साल हजारों कुत्तों को इस दायरे में लाया गया।

बारकोड सिस्टम से कुत्तों की होगी पहचान


निगम ने अब नसबंदी और टीकाकरण कराए गए कुत्तों की पहचान के लिए बारकोड सिस्टम लागू करना शुरू कर दिया है। यह बारकोड कुत्तों पर लगाया जा रहा है, जिससे यह तुरंत पता चल सके कि संबंधित कुत्ते का टीकाकरण और नसबंदी हो चुकी है या नहीं। अधिकारियों के मुताबिक इस व्यवस्था से दो बड़े फायदे होंगे। पहला एक ही कुत्ते की दोबारा पकड़ और सर्जरी से बचाव होगा। दूसरा किसी क्षेत्र में डॉग बाइट या बीमारी की सूचना मिलने पर कुत्ते की मेडिकल हिस्ट्री तुरंत जांची जा सकेगी। इससे समय बचने के साथ उपचार और निगरानी भी ज्यादा प्रभावी हो सकेगी।

लावारिस कुत्तों की अनुमानित संख्या करीब 50 हजार

निगम की रिपोर्ट के अनुसार फरीदाबाद में लावारिस कुत्तों की अनुमानित संख्या करीब 50 हजार है। ऐसे में 21 हजार से ज्यादा कुत्तों का नसबंदी और टीकाकरण होना एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि किसी भी शहर में यदि कुल आबादी के 70 प्रतिशत कुत्तों को नसबंदी के दायरे में लाया जाए तो आने वाले वर्षों में उनकी संख्या अपने आप नियंत्रित होने लगती है। निगम इसी लक्ष्य की ओर चरणबद्ध तरीके से बढ़ रहा है।

संसाधन बढ़ाकर दी जाएगी रफ्तार


यह सच है कि फिलहाल निगम के पास संसाधन सीमित हैं। पूरे शहर के लिए केवल दो ऑपरेशन टेबल और सीमित मेडिकल स्टाफ उपलब्ध है। इसके बावजूद निगम का दावा है कि उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग कर हर साल हजारों कुत्तों की सुरक्षित तरीके से नसबंदी और टीकाकरण किया जा रहा है। निगम अधिकारियों का कहना है कि यही कारण है कि अब अभियान को और तेज करने के लिए बुनियादी ढांचे के विस्तार पर फोकस किया गया है।
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नए वेटरनरी डॉक्टरों की होगी भर्ती


नगर निगम ने साफ किया है कि आने वाले समय में एनिमल बर्थ कंट्रोल कार्यक्रम को और प्रभावी बनाया जाएगा। इसके तहत ऑपरेशन टेबल की संख्या दो से बढ़ाकर छह करने की योजना है। साथ ही नए वेटरनरी डॉक्टरों और डॉग कैचर्स की भर्ती के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इसके अलावा पूरे शहर की एरिया-वाइज मैपिंग की जाएगी जिससे यह तय किया जा सके कि किस वार्ड में नसबंदी और टीकाकरण की सबसे ज्यादा जरूरत है। पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत पशु कल्याण से जुड़ी संस्थाओं को भी इस अभियान से जोड़ा जाएगा।
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