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Faridabad News: सोतई में कूड़ा निस्तारण परियोजना पर घमासान, तैयारी शुरू होते ही ग्रामीणों ने खोला मोर्चा

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आबादी और खेती के बीच प्लांट प्रस्तावित होने से बढ़ा विरोध, कहा- किसी भी कीमत पर नहीं बनने देंगे
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ग्रामीणों ने पंचायत कर कूड़ाघर संघर्ष समिति का गठन किया

अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। शहर की वर्षों पुरानी कचरा समस्या के स्थायी समाधान के लिए नगर निगम ने गांव सोतई में नई कूड़ा निस्तारण परियोजना की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। करीब 3.86 करोड़ रुपये की लागत से डंपिंग यार्ड के लिए बाउंड्री और प्लेटफॉर्म निर्माण की प्रक्रिया शुरू होते ही गांव में विरोध तेज हो गया है। शनिवार को बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने पंचायत कर कूड़ाघर संघर्ष समिति का गठन किया और साफ घोषणा की कि आबादी और खेती के बीच कूड़ा निस्तारण केंद्र किसी भी कीमत पर नहीं बनने दिया जाएगा।
फरीदाबाद से प्रतिदिन लगभग 900 टन ठोस कचरा निकलता है। वर्तमान में इसका अधिकांश हिस्सा गुरुग्राम के बंधवाड़ी भेजना पड़ता है जबकि जिले में केवल करीब 200 टन कचरे का ही स्थानीय स्तर पर निस्तारण हो पा रहा है। लगातार बढ़ती आबादी, नए सेक्टरों और औद्योगिक विस्तार के कारण नगर निगम पर स्थानीय स्तर पर बड़े कचरा प्रबंधन केंद्र विकसित करने का दबाव बढ़ता जा रहा है। इसी आवश्यकता को देखते हुए सोतई, प्रतापगढ़ और मुजेड़ी में कचरा निस्तारण क्षमता बढ़ाने की योजना बनाई गई है।
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आठ एकड़ में बाउंड्री, तीन एकड़ में बनेगा प्लेटफॉर्म

नगर निगम ने सोतई में करीब आठ एकड़ भूमि की सुरक्षा के लिए जीआई बैरिकेडिंग तथा तीन एकड़ क्षेत्र में आरएमसी एम-40 ग्रेड प्लेटफॉर्म विकसित करने की परियोजना शुरू की है। प्लेटफॉर्म निर्माण पर करीब 2.05 करोड़ रुपये जबकि बाउंड्री और बैरिकेडिंग पर लगभग 1.81 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। दोनों कार्यों की कुल लागत करीब 3.87 करोड़ रुपये होगी। इसके लिए निगम ने परियोजना की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

पंचायत में बनी संघर्ष समिति, ग्रामीण बोले-विकास चाहिए, कूड़ाघर नहीं

परियोजना की जानकारी सामने आने के बाद गांव की धर्मशाला में पंचायत आयोजित की गई जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। पंचायत में सर्वसम्मति से कूड़ाघर संघर्ष समिति का गठन किया गया और देवेंद्र पहलवान को समिति का प्रधान चुना गया। ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित स्थल दो गांवों के बीच स्थित है तथा इसके चारों ओर खेती और आबादी है। उनका आरोप है कि यदि यहां कूड़ा निस्तारण केंद्र बना तो दुर्गंध, प्रदूषण, मच्छरों की संख्या बढ़ने और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। लोगों ने चेतावनी दी कि वे लोकतांत्रिक तरीके से इस परियोजना का विरोध जारी रखेंगे।

ग्रामीणों ने रखा वैकल्पिक विकास का प्रस्ताव

पंचायत में ग्रामीणों ने मांग रखी कि पंचायत की भूमि का उपयोग गांव के विकास के लिए किया जाए। लोगों ने खेल मैदान, सरकारी अस्पताल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सरकारी विद्यालय, पुस्तकालय, महिला एवं युवा प्रशिक्षण केंद्र, वृद्धजन सेवा केंद्र, बच्चों का पार्क, ओपन जिम, सामुदायिक भवन, बारातघर और कौशल विकास केंद्र जैसी सुविधाएं विकसित करने का सुझाव दिया। ग्रामीणों का तर्क है कि इससे आने वाली पीढ़ियों को स्थायी सुविधाएं मिलेंगी और गांव का समग्र विकास होगा।



आबादी वाले गांव में कूड़ाघर जैसी योजना लागू करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि हाल ही में नगर निगम के अधीन आई पंचायत भूमि का उपयोग जनहित और गांव के समग्र विकास के लिए किया जाना चाहिए।- कृष्ण रावत
यह गांव एक्सप्रेस वे के पास बसा हुआ है। अगर इस गांव में डंपिंग यार्ड को बनाया जाएगा। तो एक्सप्रेस वे से गुजरने वाले लोगों के साथ आस पास के गांव व सेक्टर के लोगों को भी दुग्ध जैसी समस्या से जूझना पड़ेगा। - कामराज रावत
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डंपिंग यार्ड बनने के बाद लोग गांव को छोड़कर जाने को मजबूर हो जाएंगे। किसानों की फसल पर भी काफी असर देखने को मिलेगा। - भूपेंद्र
पंचायत की जमीन पर अगर कुछ बनाना था तो गांव के बच्चों के लिए मैदान बनाया जाता । ताकि आने वाले समय में उनके गांव से भी होनहार खिलाड़ी खेल की दुनिया में अपना नाम रोशन करते। - तेजपाल
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