बल्लभगढ़। सेक्टर-तीन स्थित एफआरयू में जच्चा-बच्चा केंद्र होने के बावजूद अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं है, जिसकी वजह से गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए बीके अस्पताल या फिर बल्लभगढ़ स्थित सरकारी अस्पताल जाना पड़ता है। एफआरयू में हर रोज करीब 100 गर्भवती महिलाएं उपचार के लिए आती हैं, उन्हें नौ माह के दौरान करीब तीन बार अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ता है। सूत्रों के अनुसार, कुछ साल पहले तक इस अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की मशीन मौजूद थी, लेकिन मशीन बीके अस्पताल भिजवा दी गई। क्योंकि, रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति नहीं हुई थी।
निजी केंद्रों पर एक हजार में करवाती हैं अल्ट्रासाउंड
सेक्टर-3 स्वास्थ्य केंद्र के पास काफी संख्या में निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर हैं। गर्भवती महिलाओं को बीके व सरकारी अस्पताल जाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए वह इस स्वास्थ्य केंद्र के आसपास बने निजी सेंटरों पर ही अल्ट्रासाउंड करवा लेती हैं। महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए 800 से 1000 रुपये तक देने पड़ते हैं। रंगीन अल्ट्रासाउंड की कीमत 1500 से 2000 रुपये होती है।
वर्जन
जच्चा बच्चा अस्पताल होने की वजह से अल्ट्रासाउंड मशीन होना जरूरी है। रेडियोलॉजिस्ट की कमी की वजह से अल्ट्रासाउंड मशीन नहीं आ रही है। - डॉ मानसिंह, एसएमओ