1000 एमएम की जलापूर्ति लाइन और चांदावली-चावला कॉलोनी मार्ग का काम अटका, जिला प्रशासन को समन्वय के निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। शहर के बुनियादी ढांचे से जुड़ी दो महत्वपूर्ण परियोजनाएं वन विभाग से अनुमति न मिलने के कारण अटकी हुई हैं। फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण (एफएमडीए) की हालिया समीक्षा बैठक में यह मुद्दा प्रमुखता से उठा जहां अटाली से सेक्टर-25 तक प्रस्तावित 1000 एमएम जलापूर्ति लाइन और बल्लभगढ़ क्षेत्र के चांदावली-चावला कॉलोनी मार्ग के निर्माण में देरी पर चिंता जताई गई। बैठक में सीएम के प्रधान सलाहकार डीएस ढेसी ने मामले को गंभीर मानते हुए जिला प्रशासन को वन विभाग के साथ समन्वय कर जल्द एनओसी दिलाने के निर्देश दिए।
अधिकारियों के अनुसार वन भूमि डायवर्जन की अनुमति लंबित रहने के कारण दोनों परियोजनाओं पर काम शुरू नहीं हो पा रहा है। प्रशासन ने अब इसे प्राथमिकता पर लेते हुए जल्द समाधान निकालने की बात कही है।
18 किलोमीटर लंबी बिछेगी जलापूर्ति लाइन
एफएमडीए के मुख्य अभियंता ने बैठक में बताया कि गांव अटाली स्थित रेनीवेल से सेक्टर-25 के मुख्य बूस्टिंग स्टेशन तक करीब 18 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जानी है। यह 1000 एमएम व्यास की पाइपलाइन होगी। परियोजना के लागू होने पर प्रतिदिन लाखों गैलन अतिरिक्त पानी की आपूर्ति संभव होगी। इससे सेक्टर-25, बल्लभगढ़ के कई वार्ड, चावला कॉलोनी और आसपास के इलाकों में पेयजल संकट काफी हद तक कम होने की उम्मीद है। हालांकि पाइपलाइन का एक हिस्सा वन क्षेत्र की परिधि से गुजरता है, जिसके लिए वन विभाग से भूमि डायवर्जन की अनुमति जरूरी है। एफएमडीए की पांचवीं बैठक में परियोजना को प्रशासनिक मंजूरी मिल चुकी है लेकिन वन विभाग में फाइल लंबित होने के कारण कार्य आगे नहीं बढ़ पा रहा।
लागत बढ़ने का खतरा
अधिकारियों ने बैठक में यह भी बताया कि यदि अनुमति में अधिक देरी होती है तो निर्माण सामग्री और श्रम लागत बढ़ने से परियोजना का खर्च 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। वर्तमान में सेक्टर-25 का बूस्टिंग स्टेशन भी अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रहा क्योंकि उसे फीड करने वाली मुख्य पाइपलाइन उपलब्ध नहीं है।
चांदावली-चावला कॉलोनी मार्ग भी एनओसी के कारण अटका
बैठक में बल्लभगढ़ क्षेत्र की महत्वपूर्ण सड़क चांदावली से चावला कॉलोनी मार्ग का मुद्दा भी उठाया गया। यह सड़क आसपास के रिहायशी और औद्योगिक क्षेत्रों को जोड़ने वाली अहम कड़ी मानी जाती है। स्थानीय लोगों के अनुसार सड़क की स्थिति काफी खराब हो चुकी है। भारी वाहनों की आवाजाही के कारण यहां धूल और जाम की समस्या बनी रहती है। सड़क के सुदृढ़ीकरण और चौड़ीकरण के लिए मार्ग के किनारे की कुछ वन भूमि का उपयोग प्रस्तावित है, जिसके लिए पेड़ों की कटाई और भूमि उपयोग की अनुमति मांगी गई है। अनुमति मिलते ही टेंडर प्रक्रिया पूरी कर निर्माण शुरू करने की योजना है।
जिला प्रशासन को सौंपा गया समन्वय का जिम्मा
बैठक में चेयरपर्सन ने स्पष्ट किया कि विभागों के बीच समन्वय की कमी के कारण जनहित की परियोजनाएं प्रभावित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने जिला प्रशासन को वन विभाग के अधिकारियों के साथ नियमित बैठक कर तकनीकी आपत्तियों का समाधान कराने के निर्देश दिए। प्रशासन का लक्ष्य अगले 15 से 20 दिनों के भीतर आवश्यक मंजूरी प्राप्त करना है।
पानी की मांग बढ़ने से बढ़ी चिंता
गर्मी के मौसम की शुरुआत के साथ ही बल्लभगढ़ और आसपास के कई इलाकों में पेयजल की मांग बढ़ने लगी है। स्थानीय आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि नई पाइपलाइन का काम जल्द शुरू नहीं हुआ तो गर्मियों में पानी की समस्या और गंभीर हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से बढ़ते शहरी विस्तार को देखते हुए जलापूर्ति और सड़क कनेक्टिविटी से जुड़ी परियोजनाओं को समय पर पूरा करना बेहद जरूरी है, क्योंकि इनका सीधा असर शहर की जीवनशैली और औद्योगिक गतिविधियों पर पड़ता है।