संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। जिला एवं सत्र न्यायाधीश संदीप गर्ग की अदालत ने नामी गैंगस्टर विजय फरमान और कपिल चटानिया को इनामी बदमाश नरेश की हत्या करने के मामले में पुख्ता सबूत और गवाह न होने के चलते बरी कर दिया है। इन बदमाशों पर पहले से कई हत्याओं और लूट के मुकदमे दर्ज हैं।
अधिवक्ता दीपक सिंह सौरोत, राहुल सौरोत व नम्रता सिंह ने बताया कि गैंगस्टर नरेश (27) मूल रूप से नांगलोई सफीपुर रनहोला पश्चिमी दिल्ली का निवासी था। वह फरीदाबाद में ग्रीन फील्ड कॉलोनी सूरजकुंड में रह रहा था। छह अप्रैल 2018 को नरेश का किसी बात पर झगड़ा हुआ था। झगड़ा बढ़ता देख किसी ने पुलिस को सूचित किया। मौके पर पहुंची पुलिस ने देखा कि नरेश की गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए बीके अस्पताल भेजकर मृतक के पास से मिले आधार कार्ड के पते पर घरवालों को सूचित किया।
नरेश के भाई विजय ने सूरजकुंड थाने में एफआईआर दर्ज कराई कि गांव में सज्जनपाल पहलवान और पूर्व सरपंच सुरेंद्र में चुनाव के कारण आपसी मतभेद चल रहा था। नरेश सुरेंद्र के पक्ष में था। अक्टूबर 2015 को सरपंच सुरेंद्र के पक्ष वालों ने सज्जनपाल की हत्या कर दी थी। इसके बाद से नरेश घर से फरार था। जांच में पता चला कि नरेश ग्रीन फील्ड कॉलोनी में नाम बदलकर नीरज के नाम से रह रहा था।
पुलिस की जांच में खुलासा हुआ कि आपसी झगड़े के चलते बदमाश नरेश की हत्या कर दी गई थी। इसके आरोप में विजय फरमाना और कपिल चटानिया पर मुकदमा दर्ज किया गया। सोमवार को अदालत ने पुख्ता सबूत और गवाह न होने के चलते दोनों को बरी कर दिया।
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बदमाशों पर चल रहे हैं कई मामले
विजय फरमाना और कपिल चटानिया पर हत्याओं, लूट, फिरौती, हत्या की कोशिश के 50 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। दोनों पर हथियार दिखाकर कई लग्जरी गाड़ियों को लूटने के भी मामले चल रहे हैं।