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Faridabad News: यमुना से आगे अब शहर की हरियाली तक पहुंचेगा उपचारित सीवेज जल

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रोज 2.3 करोड़ लीटर ट्रीटेड पानी से सींची जाएगी ग्रीन बेल्ट, भूजल बचाने की दिशा में बड़ा कदम
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मिर्जापुर एसटीपी से सेक्टर-37 से 59 तक बिछेगी पाइप लाइन
4.30 करोड़ रुपये की परियोजना छह माह में पूरी करने का लक्ष्य


अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। लगातार गिरते भूजल स्तर, बढ़ती आबादी और पानी की बढ़ती मांग के बीच फरीदाबाद अब उपचारित सीवेज जल के पुन: उपयोग की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण (एफएमडीए) ने मिर्जापुर स्थित 80 एमएलडी क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से सेक्टर-37 से 59 तक प्रतिदिन 23 एमएलडी यानी करीब 2.3 करोड़ लीटर टर्शियरी ट्रीटेड पानी पहुंचाने के लिए पाइप लाइन परियोजना शुरू कर दी है। करीब 4.30 करोड़ रुपये की इस परियोजना पूरी होने के बाद पहली बार बड़े स्तर पर शहर की ग्रीन बेल्ट, सड़क किनारे हरित पट्टियों और एक्सप्रेसवे के आसपास विकसित हरित क्षेत्रों की सिंचाई उपचारित पानी से होगी। परियोजना को छह माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

फरीदाबाद में प्रतिदिन लाखों लीटर सीवेज का शोधन विभिन्न एसटीपी में किया जाता है। मिर्जापुर एसटीपी शहर के सबसे बड़े शोधन संयंत्रों में शामिल है। यहां से निकलने वाले उपचारित पानी का एक हिस्सा अभी यमुना नदी में छोड़ा जाता है, जबकि कुछ मात्रा का उपयोग किसानों द्वारा सिंचाई में किया जाता है। अब इसी पानी को पाइप लाइन के जरिये शहर की ग्रीन बेल्ट तक पहुंचाया जाएगा। इससे भूजल और पेयजल का उपयोग कम होगा और उपचारित पानी का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा।
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भूजल संकट के बीच राहत की उम्मीद

फरीदाबाद लंबे समय से भूजल दोहन की समस्या से जूझ रहा है। केंद्रीय भूजल बोर्ड की विभिन्न रिपोर्टों में जिले के अधिकांश ब्लॉक ओवर एक्सप्लॉयटेड श्रेणी में शामिल रहे हैं। कई क्षेत्रों में भूजल स्तर 30 से 40 मीटर या उससे अधिक गहराई तक पहुंच चुका है और हर वर्ष इसमें गिरावट दर्ज की जाती रही है। लगातार शहरीकरण, औद्योगिक इकाइयों की संख्या बढ़ने और आबादी में इजाफे के कारण भूमिगत जल पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में 23 एमएलडी यानी प्रतिदिन करीब 2.3 करोड़ लीटर उपचारित पानी का उपयोग सीधे भूजल संरक्षण से जुड़ा माना जा रहा है। यदि ग्रीन बेल्ट की सिंचाई के लिए अब भूजल के बजाय ट्रीटेड वाटर का इस्तेमाल होता है तो उतनी मात्रा में ताजे पानी की बचत होगी। जल विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इस मॉडल को उद्योगों और सरकारी संस्थानों तक भी विस्तारित किया गया तो भूजल दोहन में और कमी लाई जा सकती है।

20 से अधिक सेक्टरों की हरित पट्टियां लाभान्वित होंगी

अब तक मिर्जापुर एसटीपी से निकलने वाले उपचारित पानी का उपयोग मुख्य रूप से यमुना नदी में डिस्चार्ज और सीमित क्षेत्र में कृषि सिंचाई के लिए किया जाता रहा है। नई परियोजना के बाद इसका उपयोग शहर की ग्रीन बेल्ट के लिए भी होगा। इससे उपचारित पानी का पुन: उपयोग बढ़ेगा और यमुना में छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा भी भविष्य में कम की जा सकेगी। परियोजना के तहत सेक्टर-37 से सेक्टर-59 तक पाइप लाइन बिछाई जाएगी। इस दायरे में करीब 20 से अधिक सेक्टरों की हरित पट्टियां, एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित ग्रीन बेल्ट, डिवाइडर और सार्वजनिक हरित क्षेत्र लाभान्वित होंगे। हालांकि एफएमडीए ने अभी लाभान्वित होने वाले कुल क्षेत्रफल या पार्कों की संख्या की आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की है।

प्रदूषण से लड़ाई में भी मिलेगा सहारा

फरीदाबाद देश के सबसे प्रदूषित औद्योगिक शहरों में शामिल रहा है। सर्दियों में यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) अक्सर बहुत खराब और कई दिनों में गंभीर श्रेणी तक पहुंच जाता है। शहर में पीएम-10 और पीएम-2.5 का स्तर भी राष्ट्रीय मानकों से अधिक दर्ज होता रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना सीधे प्रदूषण कम नहीं करेगी लेकिन नियमित सिंचाई मिलने से ग्रीन बेल्ट का संरक्षण बेहतर होगा। हरियाली बढ़ने से धूल नियंत्रण, सड़क किनारे हरित आवरण बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर तापमान कम करने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही उपचारित पानी का अधिक उपयोग जल संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण होगा।
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बढ़ते शहर की जरूरत बना जल पुनर्चक्रण

करीब 22 लाख आबादी वाले फरीदाबाद में पानी की मांग लगातार बढ़ रही है। ग्रेटर फरीदाबाद में तेजी से विकसित हो रहे नए सेक्टर, औद्योगिक क्षेत्र और बढ़ती आवासीय परियोजनाएं भविष्य में जल संकट को और बढ़ा सकती हैं। इसी कारण हरियाणा सरकार शहरों में यूज एंड रीयूज नीति के तहत उपचारित पानी के अधिकतम उपयोग पर जोर दे रही है। मिर्जापुर एसटीपी से शुरू होने वाली यह परियोजना इसी नीति का हिस्सा मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भविष्य में ट्रीटेड वाटर नेटवर्क को उद्योगों, सरकारी कार्यालयों, पार्कों, निर्माण कार्यों और अन्य गैर-पेय उपयोगों तक विस्तारित किया जाता है तो शहर में लाखों लीटर ताजे पानी की बचत होगी। इससे भूजल पर दबाव घटेगा और यमुना में छोड़े जाने वाले उपचारित पानी का भी बेहतर उपयोग हो सकेगा।


इस परियोजना को लेकर कागजी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जल्द ही जमीनी स्तर पर काम शुरू कर दिया जाएगा।
देवेंद्र भड़ाना, कार्यकारी अभियंता, एफएमडीए
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