यूपी पीडब्ल्यूडी ने अक्टूबर में काम शुरू करने की करी थी तैयारी, काम शुरू होते ही फिर लगानी पड़ी है रोक, बढ़ाकर मुआवजा मांग रहे हैं किसान
रोहित शर्मा
फरीदाबाद। फरीदाबाद से सीधा ग्रेटर नोएडा को जोड़ने वाले मंझावली पुल के लिए लोगों को अभी और इंतजार करना पड़ेगा। यूपी के किसान अभी भी अपनी जमीन सरकार को देने के लिए तैयार नहीं हैं और न्यायालय की शरण में पहुंच गए हैं। शुक्रवार को यूपी के पीडब्ल्यूडी विभाग ने अपनी तरफ खेतों में निशान लगाने का काम शुरू किया था, लेकिन बाद में उन्हें काम रोकना पड़ा। अब किसानों को मनाने के लिए दुबारा से प्रयास शुरू किए जाएंगे। जिससे पुल के निर्माण के काम को जल्द से जल्द पूरा किया जा सके।
हरियाणा और उत्तर प्रदेश के बीच की दूरी को कम करने के लिए लगभग 36 साल पहले यमुना नदी पर मंझावली पुल बनाने के लिए योजना तैयार हुई थी। 2014 में दोनों राज्यों की सरकारों के आपसी तालमेल के बाद यह योजना शुरू हुई थी। हरियाणा सरकार की ओर से 2021 में यमुना नदी के पुल का निर्माण पूरा कर दिया गया था। वहीं फरवरी 2025 में हरियाणा की सीमा तक अप्रोच रोड को भी तैयार कर दिया गया था। लेकिन यूपी की तरफ 1.7 किलोमीटर की सड़क का काम शुरू भी नहीं हो सका है। यह सड़क किसानों के खेत से होकर गुजरनी है, जिसके लिए उनकी जमीनों को अधिग्रहित किया गया था। लेकिन कुछ किसान ज्यादा मुआवजे की मांग पर अड़े थे और न्यायालय चले गए थे। अब न्यायालय ने किसानों के मामले को निस्तारित करने के लिए जिला प्रशासन को एक महीने का समय दिया है।
-
शुक्रवार को खेतों में लगाए गए थे निशान
मंझावली पुल को शुरू करने के लिए यूपी सरकार को 1.7 किलोमीटर की सड़क बनानी है, जो हरियाणा सीमा पर अप्रोच रोड से जुड़ेगी। शुक्रवार को यूपी पीडब्ल्यूडी की ओर से सड़क निर्माण का काम करने वाली कार्यदायी संस्था ने रोड के लिए खेतों में निशान लगाने का काम शुरू किया था। जिससे यहां पर मिट्टी डालने का काम जल्द से जल्द शुरू किया जा सके। लेकिन उन्हें यह काम तुरंत ही रोकना पड़ा। अब टीम अगले सप्ताह दुबारा काम शुरू करने की तैयारी कर रही है।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक माह का दिया था समय
पीडब्ल्यूडी को सड़क निर्माण के लिए यूपी सरकार की ओर से 66 करोड़ रुपये का बजट जारी हुआ था। वहीं लगभग 5 हेक्टेयर जमीन के लिए 130 किसानों की सहमति ली गई थी। लेकिन 11 किसानों ने उन्हें दिए जाने वाले मुआवजे पर आपत्ति उठा दी थी। किसान बलराज सिंह इस मामले में यूपी के इलाहाबाद उच्च न्यायालय गए थे, जिसके बाद 10 सितंबर 2026 को न्यायालय ने किसानों की सुनवाई करते हुए एक माह में इस मामले के निस्तारण के लिए गौतमबुद्धनगर के जिलाधिकारी को निर्देश दिए थे। हालांकि प्रशासन की ओर से दावा किया गया था कि अक्टूबर में यूपी की ओर मंझावली पुल का काम शुरू कर दिया जाएगा। लेकिन शुक्रवार को यह काम रुक गया।
यूपी की ओर बननी है 1.77 किलोमीटर की सड़कउत्तर प्रदेश सरकार को मंझावली पुल से जुड़ने के लिए 4.99 किलोमीटर की सड़क बनानी है। इसमें 1.77 किलोमीटर की नई सड़क बननी है और पहले से बनी हुई 3.29 किलोमीटर लंबी सड़क को दुरुस्त करना है। जिसके बाद फरीदाबाद से ग्रेटर नोएडा आने जाने के लिए लोगों को फोर लेन सड़क मिलेगी। यूपी में जगनपुर अफजलपुर, दोआब, मुर्शदपुर और अट्टा गुजरान गांवों से किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई थी। उन्हें इसके लिए 3720 रुपये प्रति वर्ग मीटर से मुआवजा दिया गया था, लेकिन कई किसानों ने इसमें आपत्ति लगा दी थी। उन्होंने इस दर से अपनी जमीन देने से इनकार कर दिया था।
-
यीडा के रेट से मुआवजा की मांग कर रहे हैं किसान
न्यायालय की शरण में जाने वाले किसान व जगनपुर अफजलपुर गांव के पूर्व प्रधान बलराज सिंह ने बताया कि यीडा के अधिसूचित क्षेत्र में जमीन अधिग्रहण करने पर किसानों को 4300 की दर से मुआवजा दिया जा रहा है। यीडा लिंक एक्सप्रेस-वे के लिए बुलंदशहर के किसानों को भी इसी दर से भुगतान कर रही है। लेकिन यमुना विकास प्राधिकरण के क्षेत्र में आने के बाद भी उन्हें 3720 रुपये की दर से मुआवजा मिल रहा है। उन्होंने बताया कि वह यीडा की दर से मुआवजा मिलने पर ही अपनी जमीन सरकार को सौंपेंगे। इसीलिए वह उच्च न्यायालय की शरण में गए थे। अगर इस दर से मुआवजा नहीं मिला तो वह अपनी जमीन नहीं देंगे। उन्होंने बताया कि रविंद्र प्रधान ने भी स्टे के लिए गौतमबुद्धनगर न्यायालय में याचिका लगाई थी। शुक्रवार को न्यायालय ने इस मामले में सुनवाई के लिए 24 अक्टूबर की तिथि दी है। जिसमें प्रशासन को अपना पक्ष रखना है। ऐसा न होने पर उन्हें भी स्टे मिल जाएगा।
किसानों को मनाने की जारी है कोशिश
यूपी सरकार के मंझावली पुल इंचार्ज प्रमोद कुमार ने बताया कि अक्टूबर में पुल का काम शुरू करने की तैयारी थी। इसलिए शुक्रवार को खेतों में निशान लगाने का काम शुरू किया गया था। लेकिन कई किसान अभी भी ज्यादा मुआवजे की मांग पर अड़े हैं। उनसे बात कर उन्हें मनाने का प्रयास जारी है। किसानों की रजामंदी मिलते ही तेजी से मंझावली पुल के काम को पूरा किया जाएगा।