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Faridabad News: लावारिस कुत्तों का बढ़ रहा खतरा, रोजाना 50-60 लोग पहुंच रहे अस्पताल

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जनवरी 2025 से अब तक करीब 10 हजार लोगों को एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगाए गए


संवाद न्यूज एजेंसी


पलवल। जिले में लावारिस कुत्तों और बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट की स्पष्ट गाइडलाइन के बावजूद जमीनी स्तर पर हालात सुधरते नजर नहीं आ रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा है कि स्कूल, अस्पताल, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और अन्य सार्वजनिक स्थलों से कुत्तों को हटाया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में यह भी स्पष्ट किया है कि कुत्ता काटने के मामलों में राज्य सरकार और स्थानीय निकायों को भारी मुआवजा देना पड़ सकता है। इसके साथ ही अदालत ने यह भी कहा है कि सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों को खाना खिलाने वाले लोगों और संगठनों की जवाबदेही भी तय की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद जिला प्रशासन इन निर्देशों को लागू करने में असमर्थ दिख रही है। शहर में लावारिस कुत्तों की संख्या इस कदर बढ़ गई है कि सड़कों पर उनका कब्जा साफ नजर आता है।
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प्रतिदिन 50-60 कुत्ता काटने के आते हैं मामले

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि रोजाना 50 से 60 लोग कुत्तों के काटने की घटनाओं के बाद जिला नागरिक अस्पताल पहुंच रहे हैं। जनवरी 2025 से अब तक करीब 10 हजार लोगों को एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगाए जा चुके हैं। नगर परिषद शहर में तीन सरकारी डॉग शेल्टर बनवा रही है, अब तक केवल एक ही शेल्टर बनकर तैयार हुआ है। बाकी दो पर निर्माण कार्य अधूरा है। इसका सीधा असर आमजन की सुरक्षा पर पड़ रहा है।
दयालु योजना के तहत मिलता है मुआवजा

प्रदेश सरकार दीन दयाल उपाध्याय अंत्योदय परिवार सुरक्षा योजना (दयालु)-2 के तहत 1.80 लाख रुपये या उससे कम वार्षिक आय वाले परिवार का कोई सदस्य कुत्तों, बंदरों या अन्य बेसहारा पशुओं के हमले में मारा जाता है या दिव्यांग होता है, तो उसे सरकार की ओर से पांच लाख रुपये तक का मुआवजा दिए जाने का प्रावधान है। जिले में इस योजना के तहत 18 लोगों ने आवेदन किया था। जांच के बाद केवल दो आवेदन ही वैध पाए गए है। इन दो लोगों को भी मुआवजा नहीं मिल पाया है।
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वर्जन
कुत्ते या बंदर के काटने पर सबसे पहले घाव को साबुन और साफ पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। उन्होंने घरेलू नुस्खों से बचने की सलाह देते हुए कहा कि तुरंत नजदीकी चिकित्सक से उपचार कराना जरूरी है। - डॉ. सुदीप सैनी, जनरल फिजिशियन, जिला नागरिक अस्पताल
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