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Faridabad News: एक दिन में पांच लाख रुपये ठगने का दिया जाता था लक्ष्य

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टारगेट पूरा होने पर सभी को प्रोत्साहन राशि भी दी जाती थी
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रिमांड के बाद टीम लीडर भी गया जेल, मुख्य आरोपी की तलाश में क्राइम ब्रांच
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। फर्जी कॉल सेंटर मामले में क्राइम ब्रांच डीएलएफ की टीम ने टीम लीडर को एक दिन के रिमांड के बाद रविवार को अदालत में पेश कर जेल भेज दिया। अन्य 35 आरोपी पहले दिन ही जेल जा चुके हैं। टीम लीडर जय सिंह ने पुलिस पूछताछ में बताया कि पूरी टीम को एक दिन में कम से कम पांच लाख रुपये ठगने का टारगेट दिया जाता था। टारगेट पूरा होने पर सभी को प्रोत्साहन राशि भी दी जाती थी। पुलिस मुख्य आरोपी कबीर की तलाश में जुटी है।
क्राइम ब्रांच डीएलएफ प्रभारी कप्तान सिंह ने बताया कि आरोपी कबीर पूरे कॉल सेंटर का मास्टरमाइंड है। वह दिल्ली का रहने वाला है। पुलिस की टीमें आरोपी की तलाश में दबिश दे रही हैं। आरोपी अमेरिका के लोगों को ही ठगते थे। मामला विदेशी होने के नाते पीड़ित वहां के थाने में शिकायत नहीं करता था। इस बात का आरोपियों को फायदा मिलता था। आरोपी प्रत्येक व्यक्ति से 100 से 500 डॉलर तक की ठगी करते थे। भारत में ये पैसे अमेरिका के मुकाबले करीब 80 गुणा हो जाते हैं। अमेरिका के लोगों के लिए छोटी रकम होने के कारण वहां के पीड़ित गौर नहीं करते। रोजाना पांच लाख रुपये का टारगेट पूरा करने पर कबीर पूरी टीम को प्रोत्साहन राशि भी देता था।
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खुद उपलब्ध कराता था पूरा डाटा
पूछताछ में सामने आया कि मुख्य आरोपी कबीर खुद डाटा उपलब्ध कराता था। आरोपी ने सभी कर्मचारियों को 25 से चालीस हजार रुपये मासिक वेतन पर रख रखा था। टारगेट पूरा करने पर अतिरिक्त भुगतान मिलने पर सभी कर्मचारी एक से डेढ़ लाख रुपये मासिक वेतन पा लेते थे। कबीर सप्ताह में केवल एक या दो बार ही आता था। वह ज्यादा लोगों से बातचीत नहीं करता था और वेतन भी नकद में ही देता था। अमेरिकियों से पैसे ठगने के बाद किस खाते में रकम डाली जाती थी, उस बारे में भी कबीर ही जानता है। कर्मचारियों के आने जाने के लिए कबीर ने कैब सर्विस दे रखी थी, जो अक्सर बदलती रहती थी।
थाने से 500 मीटर दूरी पर करते रहे ठगी, नहीं लगी भनक
आरोपी स्प्रिंग फील्ड काॅलोनी में बैठकर करीब डेढ़ साल से विदेशियों को हर माह करोड़ों का चूना लगा रहे थे। सेक्टर 31 थाना से मात्र 500 से 700 मीटर दूरी पर बैठकर आरोपी सारा काम करते रहे और स्थानीय पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी। प्रत्येक थाना में पुलिस ने ग्राम प्रहरी नियुक्त किए हैं जो अपने इलाके के सभी मौजिज लोगों की जानकारी और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखता है। इसके अलावा राइडर और खुद थाना प्रभारी की गश्त की पकड़ में भी मामला नहीं आया। पूरी रात 30 से 35 लोग पुलिस की नजर में आए बिना आराम से पूरा काल सेंटर चलाते रहे। इसके साथ ही गुप्तचर विभाग और पुलिस आयुक्त की सुरक्षा शाखा की आंखों में भी आरोपियों ने धूल झोंक रखी थी।
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ये है पूरा मामला
शुक्रवार देर रात डीएलएफ क्राइम ब्रांच की टीम ने शहर में चल रहे एक फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया था। कॉल सेंटर स्प्रिंग फील्ड कॉलोनी बाजार स्थित ओम प्लाजा की दूसरी मंजिल पर चल रहा था। पुलिस ने मौके से 36 युवक-युवतियों को गिरफ्तार किया था। सभी खुद को बैंक ऑफ अमेरिका का कर्मचारी बताकर विदेशी लोगों से ठगी करते थे। पुलिस को मौके से लैपटॉप व ठगी करने के लिए डायरी में लिखे कुछ नोट्स बरामद हुए। शनिवार शाम सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया गया। वहां से 35 आरोपियों को जेल भेज दिया गया था।
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