शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक 300 के पार पहुंच गया, सेक्टर-11 इलाका सबसे प्रदूषित रहा
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने प्रदूषण में गिरावट को देखते हुए 24 दिसंबर को ग्रेप (ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान) का चौथा चरण हटाने का आदेश जारी किया था। इस आदेश के महज चार दिन बाद ही हालात फिर से बिगड़ गए। शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक 300 के पार पहुंच गया है, जो बेहद गंभीर स्थिति को दर्शाता है। शहर का सेक्टर-11 इलाका सबसे प्रदूषित रहा। यहां का एक्यूआई 308 दर्ज किया गया। वहीं बल्लभगढ़ का 303 रहा।
प्रशासन द्वारा प्रदूषण को नियंत्रित करने के प्रयासों में कमी के चलते प्रदूषण एक बार फिर से बढ़ गया है। सड़कों पर धूल नियंत्रण के लिए पानी का छिड़काव, निर्माण स्थलों पर निगरानी जैसे कदम कारगर साबित नहीं हो रहे हैं। कई जगहों पर खुले में कूड़ा जलाया जा रहा है, जिससे हवा में जहरीली गैसें घुल रही हैं। इसके अलावा निर्माण कार्यों के दौरान धूल उड़ने से रोकने के जरूरी उपाय नहीं अपनाए जा रहे हैं, जिससे आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों को सांस लेने में परेशानी हो रही है।
प्रदूषण बढ़ने का कारण जागरूकता अभियानों की कमी भी है। प्रशासन द्वारा लोगों को प्रदूषण के प्रति जागरूक नहीं किया जा रहा है। वहीं सड़कों पर बिना जांच के पुराने और अधिक धुआं छोड़ने वाले वाहन धड़ल्ले से दौड़ते नजर आ रहे हैं। कई वाहन मालिक नियमों की खुलेआम अनदेखी कर रहे हैं। लोगों की लापरवाही पूरे शहर की हवा को खराब कर रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ सरकारी आदेश और प्रतिबंधों से प्रदूषण पर पूरी तरह काबू पाना संभव नहीं है। शहर के नागरिकों को भी आगे आना होगा, तभी प्रदूषण की स्थिति में स्थायी सुधार संभव है। वहीं पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि लोगों को खुले में कूड़ा जलाने से बचना चाहिए, वाहनों की समय पर प्रदूषण जांच करानी चाहिए और निर्माण कार्यों में नियमों का पालन करना चाहिए।