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Faridabad News: डिजिटल होगी नगर निगम की कार्यप्रणाली, जल्द हो सकेंगे काम

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जीआईएस लैब के जरिए शहर के हर कोने का डिजिटल नक्शा तैयार किया जाएगा
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अमर उजाला ब्यूरो

फरीदाबाद। शहर के विकास और प्रशासनिक व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में नगर निगम फरीदाबाद ने एक बड़ा और दूरगामी कदम उठाया है। नगर निगम द्वारा अत्याधुनिक जीआईएस लैब की स्थापना की जा रही है। जिसके लिए हाई-एंड तकनीक से लैस वर्कस्टेशन की क्षमता वाले आधुनिक कंप्यूटिंग सिस्टम लगाए जाएंगे। इस पहल से नगर निगम की कार्यप्रणाली बदलने से आम लोगों को काफी लाभ मिलेगा।


जीआईएस लैब के जरिए शहर के हर कोने का डिजिटल नक्शा तैयार किया जाएगा। सड़कों, नालियों, सीवर लाइन, पानी की पाइपलाइन, बिजली नेटवर्क, सरकारी संपत्तियों, पार्कों, कॉलोनियों और भवनों का सटीक डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा। अभी तक कई योजनाएं कागजी नक्शों और अनुमान के आधार पर बनती हैं जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है। जीआईएस तकनीक के लागू होने से अब डेटा आधारित और सटीक योजना निर्माण संभव होगा।
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कागजी कार्रवाई व जमीनी कार्य का अंतर होगा खत्म


अभी तक निगम व अन्य विभागों की तरफ से किसी भी विकास कार्य को करने से पहले उसकी कागजी कार्रवाई की जाती है। लेकिन कागजी कार्रवाई में हर पहलू को विस्तार से समझाना मुश्किल होता है इसके कारण कई बार जमीनी स्तर पर काम शुरू होने के बाद कई अंतर देखे जाते थे इसके कारण बीच में लागत बढ़ना या समय बढ़ने से कई सारी परेशानियां सामने आती है। अब इन सभी समस्याओं पर ब्रेक लगाने की तैयारी की जा रही है।






आम लोगों को मिलेगा सीधा लाभ


जीआईएस लैब का सबसे बड़ा लाभ शहरवासियों को मिलने वाला है। इससे सड़क, पानी और सीवर से जुड़ी शिकायतों का तुरंत समाधान संभव होगा क्योंकि समस्या की लोकेशन तुरंत सिस्टम में दिख जाएगी। वहीं नई सड़क, ड्रेनेज या पाइपलाइन डालने से पहले मौजूदा नेटवर्क की पूरी जानकारी उपलब्ध होगी, जिससे बार-बार खुदाई की समस्या कम होगी। वहीं प्रॉपर्टी टैक्स, जल शुल्क और अन्य नगर निगम करों में पारदर्शिता आएगी। संपत्तियों का डिजिटल मैप होने से गलत असेसमेंट और विवादों पर रोक लगेगी। अवैध निर्माण और अतिक्रमण की पहचान आसानी से हो पाएगी जिससे शहर की अव्यवस्थित ग्रोथ पर लगाम लगेगी।


स्मार्ट सिटी की ओर मजबूत कदम


नगर निगम अधिकारियों के अनुसार जीआईएस लैब फरीदाबाद को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने की दिशा में रीढ़ साबित होगी। भविष्य में ट्रैफिक मैनेजमेंट, आपदा प्रबंधन, वर्षा जल निकासी और पर्यावरण निगरानी जैसे क्षेत्रों में भी जीआईएस डेटा का उपयोग किया जाएगा। बारिश के दौरान जलभराव वाले इलाकों की पहले से पहचान कर समाधान तैयार किया जा सकेगा।

अत्याधुनिक तकनीकी व्यवस्था


जीआईएस लैब में लगाए जाने वाले वर्कस्टेशन उच्च स्तरीय हार्डवेयर से लैस होंगे। जानकारी के अनुसार इनमें कम से कम 1200 वाल्ट या उससे अधिक की 80 प्लस टाइटेनियम रेटिंग वाली रेडंडेंट पावर सप्लाई होगी। जिससे सिस्टम बिना रुकावट लंबे समय तक काम कर सकेगा। इसके साथ ही इसमें टीपीएम 2.0 हार्डवेयर सिक्योरिटी भी होगी इससे संवेदनशील शहरी डेटा पूरी तरह सुरक्षित रह सकेगा।


मेक इन इंडिया को बढ़ावा दे रहा निगम



नगर निगम ने इस परियोजना में मेक इन इंडिया नीति को विशेष प्राथमिकता दी है। इस कार्य को पूरा करने के बाद काम करने वाली एजेंसी को 3 साल तक की ऑनसाइट वारंटी देनी होगी। वहीं एजेंसी का सर्विस सेंटर भी राज्य में होना आवश्यक है। अधिकारियों के अनुसार इसमें भारतीय कंपनियों को प्राथमिकता दी जाएगी।



प्रशासनिक कामकाज होगा तेज व पारदर्शी
जीआईएस लैब के शुरू होने के बाद नगर निगम के विभिन्न विभाग जैसे टाउन प्लानिंग, इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य और राजस्व एक ही प्लेटफॉर्म पर डेटा साझा कर सकेंगे। इससे फाइलों के चक्कर, देरी और आपसी समन्वय की कमी जैसी समस्याएं काफी हद तक खत्म होंगी।


भविष्य की तैयारी आज


नगर निगम से मिली जानकारी के अनुसार कि आने वाले वर्षों में ई-गवर्नेंस, ऑनलाइन सेवाओं और डिजिटल सर्वे को और मजबूत किया जाएगा। जीआईएस लैब इस पूरे डिजिटल इको सिस्टम की नींव होगी। इसका सबसे अधिक लाभ लोगों को मिलेगा। वहीं प्रॉपर्टी आईडी में आने वाली समस्या को भी काफी हद तक दूर किया जा सकेगा।
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निगम की तरफ से लोगों की सुविधा के लिए हर स्तर पर तेजी से काम किया जा रहा है जल्द ही लोगों को इसका लाभ मिलना भी शुरू हो जाएगा। - संजीव कुमार, कार्यकारी अभियंता नगर निगम
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