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छात्रों और शिक्षकों के बीच कम हुआ लगाव : डॉ. सुनिधि

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उच्च जिला शिक्षा अधिकारी ने शिक्षा प्रणाली में आए बदलाव पर की चर्चा
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। शिक्षक दिवस के अवसर पर विशेष बातचीत में उच्च जिला शिक्षा अधिकारी और राजकीय महिला महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. सुनिधि ने शिक्षा प्रणाली में आए बदलाव पर खुलकर चर्चा की।



उन्होंने कहा कि पुराने समय में शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच गहरा लगाव और आत्मीयता होती थी। शिक्षक केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रहते थे, बल्कि बच्चों के अनुशासन और व्यवहार पर भी सीधी पकड़ रखते थे। यदि कोई विद्यार्थी शरारत करता तो कान खींचने या सिर पर हल्का सा मारने जैसी छोटी-छोटी क्रियाएं सामान्य मानी जाती थीं। डॉ. सुनिधि का मानना है कि वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो इस तरह की गतिविधियां बच्चों को सतर्क और सक्रिय बनाने में मदद करती थीं। लेकिन आज की पीढ़ी में यह निजी जुड़ाव धीरे-धीरे समाप्त होता जा रहा है। अब बच्चे किसी भी बात को जल्दी बुरा मान जाते हैं और अभिभावक भी आपत्ति जताने लगते हैं।
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डॉ. सुनिधि ने कहा कि यही वजह है कि शिक्षक और छात्रों के बीच की आत्मीयता पहले जैसी नहीं रही। उन्होंने अपने स्कूली दिनों को याद करते हुए बताया कि वह कक्षा की टॉपर थीं और पढ़ाई के साथ-साथ बैडमिंटन में भी अच्छा प्रदर्शन करती थीं। उनका मानना है कि उस दौर में पढ़ाई और खेल दोनों को बराबर महत्व दिया जाता था।
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उन्होंने चिंता जताई कि आज की पीढ़ी खेलकूद और अन्य गतिविधियों से दूरी बना रही है। हालांकि प्रतिस्पर्धा का स्तर काफी बढ़ गया है और छात्र केवल अच्छे अंक लाने पर अधिक ध्यान केंद्रित करते हैं। डॉ. सुनिधि के अनुसार शिक्षा का उद्देश्य केवल नंबर प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों का समग्र विकास होना चाहिए।
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