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Faridabad News: फंड होने पर ही विकास कार्याें के जारी होंगे टेंडर

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निगम आयुक्त ने जारी किए दिशा निर्देश, अब विकास कार्य हो सकते हैं प्रभावित
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अमर उजाला ब्यूरो

फरीदाबाद। नगर निगम के कार्यकारी अभियंता अब बिना वित्त शाखा की मंजूरी के सड़क, सीवर और पानी समेत अन्य परियोजनाओं के कार्य नहीं करा सकेंगे। विकास कार्याें का टेंडर जारी करने से पहले अभियंताओं को वित्त शाखा से बजट उपलब्धता की जानकारी लेनी होगी। इसके लिए निगम आयुक्त ने दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। ऐसे में अब विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
शहर में सीवर, पानी और सड़क समेत साफ-सफाई की जिम्मेदारी नगर निगम की है। इसके लिए एनआईटी, ओल्ड फरीदाबाद और बल्लभगढ़ जोन बने हुए हैं। जोन के कार्यकारी अभियंता लोगों की मांग के अनुसार सड़क, सीवर और पानी समेत अन्य कार्यों को कराते हैं। पहले लोगों की मांग पर कार्यकारी अभियंता कार्य का एस्टीमेट बनाकर मुख्य अभियंता और आयुक्त की मंजूरी के बाद कार्य का टेंडर लगा देेते थे। कार्य होने के बाद बिल ऑडिट व वित्त शाखा से पास होने के बाद ठेकेदार को भुगतान किया जाता था। इससे कई बार ठेकेदारों को भुगतान करने में देरी हो जाती थी। दूसरी ओर समय से भुगतान नहीं होने पर कुछ ठेकेदार हाईकोर्ट चले गए थे। इस पर हाईकोर्ट के आदेश पर अधीक्षण अभियंता व कई कार्यकारी अभियंताओं का वेतन रोक दिया गया है। इस मामले को देखते हुए कुछ दिन पहले आयुक्त ने वित्त शाखा, मुख्य अभियंता व अधीक्षण अभियंता समेत अन्य के साथ बैठक की थी। इसमें विकास कार्यों के बजट पर चर्चा की गई थी। इसके बाद निगम आयुक्त जितेंद्र कुमार ने विकास कार्यों को लेकर दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके तहत अब बिना फंड के विकास कार्यों को लेकर एस्टीमेट नहीं बनेगा। कार्य के लिए वित्त शाखा से पहले फंड की जानकारी लेनी होगी। यदि फंड होगा तो कार्य करने का टेंडर जारी होगा। इसके लिए कार्यकारी अभियंता को मुख्य अभियंता के मार्फत वित्त नियंत्रक से बजट संबंधी अनुमति लेनी होगी। हालांकि बाद में अभियंताओं से इस आदेश पर एतराज जताया। इसके बाद आयुक्त ने इसे एमसीएफ फंड में छूट दे दी है। निगम सीएम घोषणा, अमृत योजना समेत अन्य मदों से विकास कार्य करता है। कार्यकारी अभियंता ओपी कर्दम ने बताया कि आयुक्त ने नए दिशा निर्देश जारी किए हैं। इसी अनुसार अब कार्य होंगे।
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इसलिए उठाया कदम

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने निगम ठेकेदारों के दस करोड़ रुपये का भुगतान नहीं करने पर अधीक्षण अभियंता और संबंधित कार्यकारी अभियंताओं के वेतन रोकने का आदेश हाल में दिया था। इससे नगर निगम की छवि खराब हुई। इसे देखते हुए अब आयुक्त ने काम का पहले से पैसे तय करने को कहा है जिससे बाद में भुगतान में दिक्कत नहीं आए। नगर निगम ठेकेदार एसोसिएशन के प्रधान गिरिराज ने बताया कि निगम के अधिकारी अपने मनमाफिक ठेकेदारों को भुगतान कर रहे थे लेकिन कुछेक में जानबूझकर देरी कर रहे थे। हाईकोर्ट में सुनवाई 31 मई को होनी है।
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काम होंगे प्रभावित
निगम पहले अलग-अलग फंड से मिले पैसों से कार्य करता रहा है। कार्य कराने के बाद इसी अनुसार पैसे जारी होते थे। इसमें कई बार दूसरे कार्य का पैसा अन्य में जारी हो जाता था। इससे लगातार काम और भुगतान हो रहा था। अब अभियंताओं को प्रोजेक्ट बनाने से पहले फंड पर ध्यान देना होगा। ऐसे में अब विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
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