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Faridabad News: तारकोल की किल्लत से थमा विकास, फरीदाबाद के 10 बड़े प्रोजेक्ट पर असर

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मथुरा-पानीपत प्लांट से आपूर्ति बाधित, युद्ध के कारण आयात भी प्रभावित
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। शहर में चल रहे निर्माण कार्यों की रफ्तार इन दिनों अचानक धीमी पड़ गई है। सड़कों, फ्लाईओवर और आरओबी जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम करने वाली एजेंसियां तारकोल (बिटुमिन) की कमी से जूझ रही हैं जिसके चलते कई जगह काम रुक-रुक कर हो रहा है।

सबसे ज्यादा असर बाटा चौक आरओबी और अन्य सड़क परियोजनाओं पर दिख रहा है जहां निर्माण एजेंसियां बार-बार काम रोकने को मजबूर हो रही हैं। हालात यह हैं कि जिले में करीब 10 बड़े निर्माण कार्य सीधे तौर पर प्रभावित हो चुके हैं और तय समय सीमा पर इनका पूरा होना मुश्किल नजर आ रहा है।
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फरीदाबाद में निर्माण कार्यों के लिए मुख्य रूप से मथुरा और पानीपत के प्लांट से तारकोल की आपूर्ति होती है लेकिन इन दिनों इन दोनों स्रोतों से पर्याप्त मात्रा नहीं मिल पा रही है। मांग बढ़ने के बावजूद उत्पादन और वितरण में संतुलन नहीं बन पा रहा है वहीं परिवहन और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी दिक्कतों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। पहले जहां जरूरत पड़ने पर अन्य राज्यों या बाहरी स्रोतों से सप्लाई मिल जाती थी अब वह विकल्प भी सीमित हो गया है।


निर्माण एजेंसियां परेशान, काम बार-बार ठप

बाटा चौक पर बन रहे आरओबी का काम इस संकट की गंभीरता को दिखाता है। यहां काम कर रही एजेंसी को कई बार तारकोल की कमी के कारण निर्माण कार्य रोकना पड़ा है। इससे मशीनरी और श्रमिक खाली बैठने को मजबूर हो रहे हैं और प्रोजेक्ट की लागत व समयसीमा दोनों प्रभावित हो रही हैं। बार-बार काम रुकने से निर्माण की गुणवत्ता पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।


कई बड़े प्रोजेक्ट पर असर, शहर की रफ्तार थमी

फरीदाबाद में इस समय करीब 10 बड़े निर्माण कार्य एक साथ चल रहे हैं, जिनमें फ्लाईओवर, रेलवे ओवरब्रिज, मुख्य सड़कों का पुनर्निर्माण और सेक्टरों के अंदर की सड़कें शामिल हैं। इन कार्यों की धीमी रफ्तार का असर शहर के समग्र विकास और ट्रैफिक प्रबंधन दोनों पर पड़ रहा है।


तारकोल के साथ लेबर भी मिलना मुश्किल

वहीं विकास कार्य करवा रहे ठेकेदारों का कहना है कि तारकोल के साथ अब लेबर मिलने में भी काफी मुश्किल हो रही है। अधिकतर लोग अपने गांव जा रहे हैं। रेगुलर वाली लेबर न मिलने पर मजबूरन लेबर चौक से मजदूर लाने पड़ रहे हैं। वहीं लेबर चौक से लाए गए मजदूर उतना ठीक काम नहीं कर पाते है जितना ठेकेदार की रेगूलर लेबर करती है। इससे काम धीमा होने के साथ लागत पर भी असर आ रहा है।
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बाटा आरओबी का काम किया जा रहा है। लोगों को कोई परेशानी न हो इसका भी ध्यान रखा जा रहा है। समय पर काम करने के लिए एजेंसी को निर्देश जारी किए गए हैं। - प्रकाश लाल, कार्यकारी अभियंता पीडब्ल्यूडी
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